Friday, 11 December 2020

मांसाहार।

_जीव हत्या और मासांहार_
----------------------------------------

*जो हमारे हिन्दू भाई कुर्बानी करने पर सवाल उठाते हैं वह अपनी धार्मिक किताबें एक बार अवश्य पढ़ें! हमारा मकसद किसी को नीचा दिखाना नहीं ना ही किसी महापुरुष के उपर गलत इलजाम लगाना है बल्कि लोगों को सच बात से रुबरु करना हैं*
➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖

👉 राम जी के पिता दशरथ जी भी शिकार के लिए जाया करते थे और एक दिन गलती से पानी पीता हुआ हाथी समझकर उन्होंने सरवन कुमार को अपने तीर से मार डाला अब सवाल ये उठता है क्या जंगल में शांति से पानी पीता हुआ हाथी हिंसक हो सकता है।

Reference

 *📕वाल्मीकि रामायण जगदीश्वरानंद सरस्वती अयोध्या कांड,48/9-15*

👉राम जी और लक्ष्मण जी दोनों ने मिलकर 4 किस्म के महा मुर्गों का तीर से प्रहार करके वध कर दिया।

Reference

 *📕वाल्मीकि रामायण गीताप्रेस अयोध्या कांड 52/102*

 👉 साधु के भेष में रावण को सीता जी ने कहा कि उनके स्वामी आते होंगे और जंगली वरह (सूअर) को मारकर खाना लाते होंगे।

Reference

*📕वाल्मीकि रामायण गीताप्रेस अरण्यकांड 47/23,24*

 👉 राम जी की सेना में निषाद लोगों को मुर्ग और मांस खाने को दिया गया।

Reference

*📕वाल्मीकि रामायण गीताप्रेस आयोध्याकांड 91/70*

👉रामायण काल में पशु हत्या को बड़ी चीज नहीं थी असवा महंगा यज्ञ में राजा दशरथ जी ने कई पशुओं की बलि दी थी।

Reference

*📕वाल्मीकि रामायण गीताप्रेस बाल कांड सर्ग,14*

 👉और यह बात कोई वेद विरुद्ध नहीं है शतपथ ब्राह्मण जो मध्याधीन वेद का ब्राह्मण ग्रंथ है उसमे भी अश्वमेघ में पशु हत्या के बारे में लिखा है।

Reference

*📕शतपथ ब्राह्मण 13/5/2/1,2*

 👉 और वैदिक कोष में भी यही चीज है कि अश्वमेघ में 300 पशुओं की हत्या की जाती थी

Reference

*📕वैदिक कौश चौखम्बा,पेज 29*

👉 और हिंसक पशु सिर्फ मांस खाने वाले नहीं होते बल्कि घास खाने वाले भी होते हैं और उन दोनों को मारने का आदेश है और जो रूके उन लोगों को हिंसक जानवरों के मुंह में फेंकने का आदेश है

Reference

 *📕यजुर्वेद दयानंद भाष्य 10 46 14*

 इस पशुओं में हिंसक गौमाता भी आती है

 👉ऋग्वेद सायण भाषा के अनुसार इन्द्र 15 से 20 सांड और बेल पकाकर खा खा कर मोटा होता हैं।

Reference

 *📕ऋग्वेद सायण भाष्य 10/ 86/14*

*नोट 👆👆* 

*उपर वाले इस मंत्र का उल्लेख बाबा साहब भीमराव अंबेडकर जी ने भी अपनी किताब "अछूत कौन और अछूत कैसे " के पेज नंबर 87 पर उल्लेख किया है*

👉 रामचंद्र जी रोजाना हिरन का शिकार किया करते थे

*📕रामचरित मानस बालकाण्ड 204 के 1,2 गीताप्रेस गोरखपुर*





◆◆◆◆◆

🍂🌱🍂🌱🍂🌱🍂🌱🍂🌱🍂

              *आयुर्वेद और गौमांस*


हमारे हिन्दू भाईयों के यहाँ गाय का बहुत बडा दर्जा हैं यहा तक की उसकी पूजा भी होती हैं फिर भी आयुर्वेदिक ग्रंथों मे गोमांस के फायदे बताऐ हैं आइये देखते हैं आयुर्वेद की प्रसिद्ध पुस्तकों में गोमांस का उल्लेख! हम किसी को ठेस नहीं पहुचाना चहते बल्कि उन्हीं के घर से आईना दिखाना चहते हैं की जिनके यहां गाय का इतना बडा स्थान हैं उन्हीं की आयुर्वेदिक ग्रंथों में गौमांस खाने के फायदे बताऐ है 

--------------------------------------------------------

"गव्यं पवित्रमनिलापहम और भ्रवत्सलवणं मांसमेकशफोद्भवम्" ||

*👉अर्थात* गौ मांस श्वास,कास,प्रतिष्याय और विषमज्वर को नष्ट करता है  थकान और जठराग्रि की अधिकता को दूर करता है 
,पवित्र और वातनाशन है! 

*📕सुश्रुत संहिता सूत्रस्थान,46/89 पेज 399,डॉ अनन्त राम शर्मा*

"गव्यं केवलवातेषू पीनसे विषमज्वरे शुष्ककासश्रमात्यगि्नमांसक्षयहित" ||

*👉अर्थात* गाय का मांस केवल वातज रोगो मे,पिनस (जुकाम) मे,विषमज्वर मे, सुखी खासी मे, श्रम (महनत करने पर आई हुई थकावट को दुर करने) मे, जाठरागि्न के अत्यन्त बढ जाने पर मांसक्षयजनित रोगों मे हितकार होता हैं!

*📕चरक संहिता सूत्रस्थान,27/79,पेज 511,डॉ ब्रह्मानन्द त्रिपाठी* 

इस पर आपत्ति जताई है कि गव्यं शब्द का अर्थ गौमांस नहीं है लेकिन चरक संहिता के अनुवाद करने वाले ने गव्यं की व्याख्या गौमास के रूप में की है *डॉ ब्रह्मानन्द त्रिपाठी* ने गव्य शब्द का अर्थ गौमास के रूप में लिया है चरक संहिता और सुश्रुत संहिता में गाय, बैल,भैंस,भेड़, हिरण,मोर,सांप,भालू,कई पक्षी,आदि का उल्लेख है।

■■■■■

स्वामी विवेकानंद के अनुसार, ब्राह्मण प्राचीन काल में गोमांस खाते थे। उनके अनुसार, जब 5 ब्राह्मणों ने एक गाय को खाया, तो वैदिक काल भारतीय इतिहास का स्वर्ण युग था।
 स्वामी विवेकानंद- स्वामी जीविलानंद की जीवनी, पृष्ठ 53

No comments:

Post a Comment

निराकर शिव और योगी शिव ~ आर्य समाज

वेदों के शिव. नमः शम्भवाय च मयोभवाय च नम: शंकराय च मयस्कराय च नमः शिवाय च शिवतराय च. [यजु० १६/४१] अर्थ- जो मनुष्य सुख को प्राप्त कराने हारे ...