विज्ञान कहता है पिता के y chromosome से पुरुष का जन्म होता है. जबकी राम का जन्म कौशल्या के खिर पिने से हुआ था. राम के अंदर y chromosome किसका था ?
_________
खुदको क्षत्रिय समजने वालो को अपने आप पर बहोत ही घमंड है.
जबकी मनुस्मृति मे स्पष्ट लिखा है कि क्षत्रिय 100 साल का भी तो भी 10 साल का ब्राह्मण उसके बाप समान है.
(मनुस्मृति 2/135)
//////////////////
लेकिन खुदको क्षत्रिय कहने वालो को इन सब बातो का कोई लेना देना नही है उन्हें बस खुदको शुद्र वैश्यो से उपर दिखाना है.
________
आओ शिवलnd पुजने वाले लिंगटो मै तुम्हे सुनाता हु आज राधा-कृष्ण कि रंगरलिया
ब्रह्मवैवर्त पुराण के श्रीकृष्ण जन्मखंड अध्याय 15 मे राधा कृष्ण के सेक्स का विस्तार से उल्लेख है
पोस्ट मे हम कुछ हि श्लोको का उल्लेख करेंगे जिनको पुरा वर्णन पढना है वो दुसरा स्क्रिनशाॅट देखे
कृष्ण ने हाथ से पकडकर राधा को बगल मे ले लिया. उसके कपडे ढिले कर दिये और चतुर्विध चुंबन किया(श्लोक 148)
चुमने से होठों का रंग तथा लिपटने से पत्रावली नष्ट हो गयी (श्लोक 149)
नये समागम से राधा रोमांचित हो गयी(श्लोक 151)
कामशास्त्र को जानने वाले श्रीकृष्ण ने 8 प्रकार से भोग किया(152)
कामयुद्ध कि समाप्ती पर तिरछी नजर वाली राधा मुस्कराने लगी(श्लोक 159)
कृष्णजी युवावस्था छोड कर फिर से बालक रुप हो गये.
वह राधा रात को हमेशा कृष्ण से भोग करती रही(श्लोक 178)
_________
आओ शिवलnd पुजने वाले लिंगटो मै तुम्हे सुनाता हु आज राधा-कृष्ण कि रंगरलिया
ब्रह्मवैवर्त पुराण के श्रीकृष्ण जन्मखंड अध्याय 15 मे राधा कृष्ण के सेक्स का विस्तार से उल्लेख है
पोस्ट मे हम कुछ हि श्लोको का उल्लेख करेंगे जिनको पुरा वर्णन पढना है वो दुसरा स्क्रिनशाॅट देखे
कृष्ण ने हाथ से पकडकर राधा को बगल मे ले लिया. उसके कपडे ढिले कर दिये और चतुर्विध चुंबन किया(श्लोक 148)
चुमने से होठों का रंग तथा लिपटने से पत्रावली नष्ट हो गयी (श्लोक 149)
नये समागम से राधा रोमांचित हो गयी(श्लोक 151)
कामशास्त्र को जानने वाले श्रीकृष्ण ने 8 प्रकार से भोग किया(152)
कामयुद्ध कि समाप्ती पर तिरछी नजर वाली राधा मुस्कराने लगी(श्लोक 159)
कृष्णजी युवावस्था छोड कर फिर से बालक रुप हो गये.
वह राधा रात को हमेशा कृष्ण से भोग करती रही(श्लोक 178)
______
डाॅ. बाबासाहेब आंबेडकर राम के बारे मे लिखते है कि
राम के भोजन मे मांस मदिरा सम्मिलित थी. वे काफी मात्रा मे मदिरा पिते थे. और सिता को भी उसमे सहभागी बनाते थे.
नाच-गाने के लिए अप्सराएं,किन्नर, बालाएं सम्मिलित होती थी. अन्य क्षेत्रो से सुंदर औरते लायी जाती थी.
वह राम को आनंदीत करती थी राम उन्हें माला पहनाते थे.
यह उनकी नियमीत जिवनचर्या थी.
=================
हिंदु धर्म कि रिडल, पृष्ठ 328
=================
यानी कि शराब पिना,औरतो नचाना या उनके साथ संभोग करना वैदिक आर्यो पुरानी परंपरा रही है.
आज के सनातनीओ के आस्था का प्रतिक तथाकथित मर्यादा पुरुषोत्तम भी ऐसा हि करते थे.
________
आर्य किसी भी स्त्री के हाथ खुलेआम सहवास(सेक्स) करते थे,
उसे वामदेव्य व्रत कहते थे.
ऋषी पराशर ने सत्यवती के साथ इसी प्रकार का सहवास(सेक्स) किया था.
===================
प्राचिन भारत : क्रांती और प्रतिक्रांती, डाॅ. बाबासाहेब आंबेडकर
पृष्ठ 23
________
शायद वैदिक सवर्ण स्त्रीयों मे प्राचिन काल मे भी लेजबियन संबंध होते थे.
इसलिए मनुस्मृति मे लिखा है,
यदी स्त्री कन्या की योनी मे उंगली डाले तो राजा तात्काल उसका सिर मुंडवा दे या उसकी दो उंगली कटवा डाले या गधेपर चढाकर उसे सडको पर घुमावे.
(मनुस्मृति अध्याय 8, श्लोक 370)
/////////////////////////////////
यहा उंगली काटने कि सजा इसलिए है ताकी वो फिरसे किसी स्त्री कि योनी मे उंगली ना डाले.
________
क्या स्वामी दयानंद हस्तमैथुन करते थे.
सत्यार्थ प्रकाश मे स्वामी दयानंद माता-पिता बालक को कौनसी उत्तम शिक्षा करे इस विषय मे कहते है.
#उपस्थेन्द्रिय से स्पर्श और मर्दन से विर्य कि क्षीणता नपुंसकता होती है.
और हस्त मे दुर्गंध भी होता है इससे उसका स्पर्श न करे.
(सत्यार्थ प्रकाश,पृष्ठ 34)
/////////////////////////////////
स्वामी दयानंद को कैसे पता चला कि विर्य कि गंध कैसी होती है.
अब या तो उन्होंने किसी दुसरे का विर्य हाथ पर लेकर देखा होगा या फिर खुद हस्तमैथुन करके देखा होगा.
शायद उन्हें ऐसा करने कि आदत हि पड गयी थी.
और उनकी अम्मा ने उन्हें एक बार ऐसा करते हुए देखकर जोरदार डांट लगायी होगी.
इसलिए उन्होंने सत्यार्थ प्रकाश मे आर्य माताओं को हस्तमैथुन के विषय मे शिक्षा देने के लिए कहा है.
________
Abbe dubois 18 वी सदी मे भारत आया फ्रेंच यात्री था. उसने देवदासीओ के बारे मे लिखा है कि
लोग उनको वेश्या कहकर पुकारते है और उनको ब्राह्मणो के उपभोग के लिए मंदिर मे रखा जाता है.
(Hindu manners,customs and ceremonies,
Abbbe Dubois.
Page 585)
_______
ब्राह्मण कि आज्ञा का पालन करने वाले शुद्र को पृथ्वी(जमिन) पर हि खाने के लिए देना उचित है.
कारण कि जैसा कुत्ता है वैसा यह(शुद्र) भी है.
(आपस्तंभ स्मृती, अध्याय 9 श्लोक 34)
_____
कुछ लोग बामन धर्म कि इज्जत बचाने के लिए शुद्रो का ब्रह्मा के पैरो से उत्पन्न होने का स्पष्टीकरण देते है ही इससे कोई वर्ण उच्च-निच नही होता.
पैर छुना हमारी परंपरा है और पैर मजबुती का प्रतिक है.
जबकी मनुस्मृति मे साफ लिखा है कि पुरुष(ब्रह्म) नाभिसे उपर पवित्र माना गया है. उसमे मुख सबसे ज्यादा पवित्र है.
निचे के श्लोक मे कहा गया है मुख से उत्पन्न होने के कारण ब्राह्मण संपुर्ण संसार का स्वामी है.
इससे साबित होता है कि जो ब्रह्म के जितने उपर के अवयव से पैदा हुआ है उसे उतना ज्यादा पवित्र माना गया है.
इसलिए अब धर्म कि इज्जत बचाने के लिए गलत स्पष्टिकरण देकर कोई फायदा नही होने वाला.
सच्चाई sc st obc तक पोहचकर रहेगी
_______
मनुस्मृति मे नट,दर्जी,लोहार,मल्लाह,रंगसाज,सुनार, धातु के हत्यार बनाने वाले, धोबी,चमार का अन्न खाने से मना किया गया है.
============
इसमे से कुछ जातीया आज obc मे है और खुदको क्षत्रिय भी कहते है
_______
औरतो से सर्प और पशु पैदा करने वाला महान धर्म
उत्तर प्रदेश,हिंदी संस्थान ने हिंदु धर्मकोश प्रकाशित किया है जिसमे हिंदु धर्म संबंधीत एक-एक शब्द का अर्थ और विस्तार से जानकारी दि है
इसमे कश्यप ऋषी के बारे मे बताया है कि
महाभारत और पुराणों के अनुसार कश्यप ने दक्ष प्रजापती के 17 पुत्रीयों से विवाह किया
उनसे जो संतान उत्पन्न हुई उनका विवरण निम्नांकित है.
9. क्रोघवशा से सर्प
10. सुरभी से गौ और महिष
11. सरमा से श्वापद हिंस्त्र पशु
12. ताम्रा से श्येन-गृघ्र आदी
13. तिमी से जलजंतु
हिंदु धर्मकोश, राजबली पाण्डे पृष्ठ 170
=======================
अब कश्यप ने प्रजापती कि पुत्रीयों से विवाह करने पर सर्प,गाय भैस,गृघ्र(गिध),जलजंतु,हिंस्त्र पशु कैसे पैदा हो गये इसका जवाब कट्टर हिंदुओ को देना है
_______
नग्न शंकर और उसका विर्य स्खलन
आओ लिंगटो मै तुम्हे दिखाता हु तुम्हारे प्रसिद्ध देवताओ कि करतुत
अग्नी पुराण मै है कि शंकर को एक बार विष्णु का मोहिनी स्त्री रुप देखने कि इच्छा हुई
जब विष्णू ने अपना 'मोहिनी' स्त्री रुप दिखाया तब शंकर इतना मोहित हो गया कि उसने पार्वती का त्याग कर दिया
शंकर उस स्त्री का पिछा करने लगा, नग्न हो कर उस स्त्री के बाल पकडने लगा.
मोहिनी के पिछे भागते हुये जहा जहा शंकर का विर्य स्खलित हुआ वहा सोने कि खाने और शिवलिंग तयार हुये.
(अग्नि पुराण : अध्याय 3, श्लोक 15 से 25)
====================
विज्ञान के अनुसार सेक्स से पहले अगर विर्य स्खलन होता है तो वह व्यक्ती शीघ्र पतन का रोगी होता है.
मुझे लगता है कि बामनो के सारे काल्पनिक देवता और ऋषी इसी बिमारी से ग्रस्त थे.
_______
सती होने का विरोध करने वाली स्त्री को बामन किस तरह से जबरदस्ती जिंदा जलाते थे इसका वर्णन मध्य कालिन यात्री बर्नियर ने किया है.
मैने स्वयं देखा है कि एक बार ब्राह्मणो ने एक स्त्री को जो चिता से पांच छह कदम दुर हि हिचकने लगी थी ढकेल दिया और एक बार जब एक स्त्री के कपडे तक आग लगी और उसने भागना चाहा तो इन ब्राह्मणों ने लंबे लंबे बांसों कि सहायता से उसे फिर चिता मे ढकेल दिया.
बर्नियर कि भारत यात्रा पृष्ठ 193
______
महाभारत उद्योगपर्व 45/12 मे सच्चे मित्र के 6 गुण बताये गये है इसमे 6 वा गुण है कि
मित्र के मांगने पर उसके हित के लिए अपनी पत्नी को भी निछावर कर देना चाहिये
यानी कि मित्र के मांगने पर अपनी पत्नी को उसे सेक्स के लिए देना चाहिये.
आधुनिक काल मे इस आर्य प्रथा को wife swapping कहते है.
इतिहासाचार्य वि.का. राजवाडे ने अपनी पुस्तक 'भारतीय विवाह संस्था का इतिहास' मे इस प्रथा का उल्लेख किया है
_____
वैदिक आर्य सवर्ण किस तरह से अपनी हि मा बहन बेटी और अन्य रिश्तेदार स्त्रीयों के साथ सेक्स करते थे इसका प्रमाण दो संस्कृत पंडित ब्राह्मण खुद दे रहे है.
भारतीय विवाह संस्था का इतिहास( वि.का. राजवाडे)
चार्वाक दर्शन( सुरेंद्र कुमार शर्मा 'अज्ञात')
______
मंदिरो के बलात्कारी बामनो पर मध्यकालीन यात्री बर्नियर लिखता है.
जगन्नाथ पुरी के रथयात्रा के उत्सव के समय एक सुंदर कन्या का जगन्नाथ जी से विवाह किया जाता है. मुर्ती के पास बैठाकर उससे कहा जाता है कि रात को जगन्नाथ तुमसे मिलने आयेंगे और उन्हें जो आवश्यक होगा पुछ ले.
रात के समय चोर दरवाजे से एक पुजारी उस मंदिर मे चला जाता है और उस कुवारी कन्या के साथ #संभोग करता है और जो चाहता है वही उस बेचारी को विश्वास करा देता है.
(बर्नियर कि भारत यात्रा, पृष्ठ 188)
______
शिवलnd पुजने वाले लिंगटो के कुतर्को का जवाब
शिवलnd पुजने वाले लिंगटो का पिछले कुछ दिनो से एक काॅपी पेस्ट वायरल है जो आंबेडकरवादी बौद्धो पर काफी कुतर्की आरोप कर रहे है.
जिसका जवाब मै इस लेख से दे रहा हु
नये नये नकली बोद्ध बने इन भीमटो की दोग्लापंती देखिये, ये इतने confuse है कि इन्हे खुद नहीं पता की ये किनकी तरफ है ??*
जवाब 👉 सुन लो शिवलnd पुजने वाले लिंगटो हम कभी confuse नही थे हमे पता है कि हम पाखंड के खिलाफ और विज्ञानवाद कि तरफ से है.
1-एक तरफ ये भगवा को गाली देते है दुसरी तरफ बोद्ध भी भगवाधारी ही होते है*
जवाब 👉 भगवा रंग तो तुम्हारे पाखंडी लिंगटे पुर्वजो ने बुद्ध धम्म से ही चोरी किया है.
आज भगवा बदनाम होने का जिम्मेदार सिर्फ हिंदु आतंकवाद है.
भगवा पहन कर हिंदु आतंकवादी दलित मुस्लिमो पर आतंकवादी हमले करते है इसलिए भगवा का विरोध करना पडता है.
*2-एक तरफ ये अपने आप को बोद्ध कहते है और दुसरी तरफ जाति प्रमाण पत्र बनवाते हैं*
जवाब 👉 हा तो तेरी क्यों जल रही है. आरक्षण से तेरा कौनसा पाखंड खतरे मे आ गया अब ?
*3- एक तरफ हिन्दुस्तान के सविंधान में भगवान राम,कृष्ण और हनुमान जी की फोटो है और दुसरी तरफ ये इन सब को काल्पनिक बताते है*
जवाब 👉 संविधान के प्रथम संस्करण पर राम कृष्ण कि फोटो है तो क्या हुआ ? नोट पर भी तो गांधी कि तस्वीर होती है तो क्या शिवलnd पुजने वाले लिंगटे माफिवीर को छोड कर गांधी को अपना महापुरुष मानेंगे?
वैसे लिंगटो के घर मे अगर स्पायडर मॅन कि तस्वीर होगी तो क्या स्पायडर मॅन ऐतिहासिक पात्र हो जायेगा ?
*4-एक तरफ ये ब्राह्मण को गाली देते है दुसरी तरफ ब्राहमणों के सरनेम अंबेडकर को अपना मानते हैं, एक ब्राह्मण ने ही अपना सरनेम देकर भीमराव शकपाल को भीमराव अंबेडकर बनाया थ
जवाब 👉 सुन लो लिंगटो सरनेम देने वाले एक ब्राह्मण के कारण हम बाकी मनुवादी आतंकवादी ब्राह्मणो के खिलाफ बंद कर दे क्या?
*5- एक तरफ ये मनुस्मृति को गाली देते है दुसरी तरफ बोद्ध धर्म के पंचशील नियमों का पालन करने को कहते हैं जो मनुस्मृति से ही लिये गये हैं*
जवाब 👉 शायद शंकर का लिंग पुज पुज कर इन लिंगटो का दिमाग भी लिंग कि तरह बन गया है.
सुन लो लिंगटो पंचशिल मनुस्मृति से नही लिये गये है बल्की मनुस्मृति का सारा तत्वज्ञान पंचशिल के विरोध मे है.
पढो अब ठिक से
1. हिंसा न करना
(मनुस्मृति पशुबली देकर हिंसा कि सलाह दि है. शुद्र को कठोर दंड विधान है ये हिंसा नही तो क्या है)
2. चोरी न करना
(चोरी करने का दंड तो मनुस्मृति मे है लेकिन ब्राह्मणो को इसमे कोई दंड नही है. अर्थात मनुस्मृति ब्राह्मण को चोरी करने से नही रोखती)
3. व्यभिचार न करना,
(मनुस्मृति ने आदेश दिया है कि राजा ब्राह्मणो के उपभोग के लिए स्त्रीयों का इंतजाम करे. ये व्याभिचार नही तो क्या है)
4. झूठ न बोलना
(मनु ने इंसानो को मुह पेट बाहु पैर से पैदा कर दिया, ये सिर्फ झुठ हि नही महाझुठ है)
5. नशा न करना।
(मनुस्मृति सहीत आपके सारे ग्रंथ सुरा मदिरा पिने वाले बेवडे ब्राह्मण क्षत्रियो से भरे हुये है)
अंतः सिद्ध है मनुस्मृति पंचशिल के खिलाफ है
*6-एक तरफ राजपूतों को ये गाली देते है दुसरी तरफ क्षत्रिय गौतम बुद्ध को अपना भगवान कहते हैं*
जवाब 👉 राजपुत गुप्त काल के बाद विदेश से आये हुण है. बुद्ध के समय राजपुत नामक कोई जाती थी हि नही.
शिवलnd पुजने वाले लिंगटे खुदको उंचा दिखाने के लिए हमेशा समाज मे गलत धारणा फैलाते रहते है
*7- एक तरफ भगवान राम को गाली देते है दुसरी तरफ थाईलैंड एक बोद्ध राष्ट्र है,उसका राष्ट्रिय ग्रंथ रामायण है और थाईलैंड के राजा को राम की उपाधि दी जाती है*
जवाब 👉 राम को गाली क्यों ना दे ? जिसने अनार्य सुर्फनखा मॅडम पर अत्याचार किया, मर्यादा पुरुषोत्तम रावण दादा को धोखे से मारा,सिता कि अग्निपरीक्षा ली, गर्भवती अवस्था मे जंगल मे छोड दिया, शुद्र शंबुक का वध किया.
ऐसा निच इंसान गाली देने के हि लायक है
*8-एक तरफ ये भगवान विष्णु को गाली देते है दुसरी तरफ बौद्ध देश कम्बोडिया में ओंकारवाट भगवान विष्णु का दुनिया का सबसे बड़ा मंदिरहै*
जवाब 👉 विष्णु तो मुझे एक समलिंगी लगता है. क्योंकी वो बात बात पर स्त्रीयों का रुप धारण कर लेता था कभी राक्षसो को धोका देने के लिए कभी शंकर को मोहीत करने के लिए.
ये जब भी अवतार धारण करके पृथ्वी पर आता था कुछ ना कुछ गलत हि करता था.
लोगों को पाखंड से मुक्त करने के लिए इसकी पोल खोल करना जरुरी है.
*9-एक तरफ संत रविदास को ये पूजते हैं और दुसरी तरफ संत रविदास जिस भगवान राम और कृष्ण के अनन्य भक्त थे उस राम और कृष्ण को ये गाली देते है*
जवाब 👉 संत रविदास ने सिर्फ कृष्ण करिम राम कुराण वेद को एक कहा है
कृस्न, करीम, राम, हरि, राघव, जब लग एक न पेखा। वेद कतेब कुरान, पुरानन, सहज एक नहिं देखा।।
वैसे उनका समय अलग था आज के विज्ञानवाद युग मे युवा रामायण महाभारत पढ कर उनकी पोल खोल कर रहे है तो तुम्हें डर क्यों लग रहा है ?
*10- एक तरफ तो अम्बेडकर की लिखी हुई किताब "भारत और पाकिस्तान का विभाजन" के अनुसार अम्बेडकर सभी मुसलमानो को पाकिस्तान भेजना चाहते थे, दुसरी तरफ ये जय भीम और जय मीम का गठबंधन बनाते हैं*
जवाब 👉 यह एक बडा दुष्प्रचार है.
बाबासाहेब का उपयोग करके मुस्लिमो के प्रती नफरत फैलाने के लिए ऐसा दुष्प्रचार किया जाता है.
उक्त ग्रंथ मे बाबासाहेब ने ऐसी निती अपनाने से परहेज करने कि राय दि थी.
उन्होंने सुस्पष्ट शब्दो मे लिखा था कि,
प्रत्येक व्यक्ती को भारत या पाकिस्तान जाने न जाने कि बात स्वेच्छिक होना चाहिये.
ये कार्य बलपुर्वक नही होना चाहिये.
इसके लिए एक कमिशन नियुक्त करे.
तो यह थे शिवलnd पुजने वाले लिंगटो के कुछ कुतर्की आक्षेपो के जवाब 👊👊👊
______
कौए ने सिता के स्तनो पर चोंच मारी थी ऐसा मै नही कह रहा हु वाल्मिकी रामायण मे लिखा है.
सिता हनुमान से कहती है,
छाती(स्तन) पर चोंच मारने के कारण उनके छाती(स्तन) से रक्त कि बुंदे झरने लगी थी.
कौए के रुप मे सिता के छाती(स्तन) पर चोंच मारने वाला इंद्र का पुत्र जयंत था.
(देखे : वाल्मिकी रामायण,सुंदर कांड 38)
____
जवानी मे बाप के सामने नंगा जाना कौनसी महान संस्कृती है ?
देवी पुराण के अनुसार सती(पार्वती) के पिता ने यज्ञ महोत्सव का आयोजन किया होता है लेकिन शिवजी के साथ विवाह करने के कारण वो उसे आमंत्रित नही करते.
इसलिए गुस्से मे सती(पार्वती) #नग्न होकर उस यज्ञ महोत्सव मे सबके सामने आ जाती है.
जिससे उनके पिता को भी लज्जित होना पडता है.
(देवी पुराण अध्याय 9, श्लोक 43-50)
______
स्त्री 10 पुरुषो के साथ सेक्स करके 10 बच्चे पैदा कर सकती है(ऋग्वेद)
///////////////////
शिवलnd पुजने वाले लिंगटो कि संस्कृती मे शायद औरत को बच्चा पैदा करने कि मशीन हि समजा जाता है.
#शिवलnd_पुजने_वाले_लिंगटे
______
मुस्लिम राज्यो मे हिंदु स्त्रीयों कि स्थिती अच्छी थी वैदिक क्षत्रिय राज्यों कि तुलना मे
किसी स्त्री को अगर सती जाना होता था उसे या परिवार के सदस्य को दिल्ली सुलतान से आज्ञापत्र लेना पडता था. अंतः अपनी इच्छा के विरुध्द कोई स्त्री सती नही होती थी.
(शोधपत्र : अर्चना मिश्रा, अ.प्र.सिंग विश्वविद्यालय)
-------
इंद्र ने जब आहिल्या के साथ नाजायझ संबंध बनाये थे तब उसके पती गौतम ऋषीने इंद्र को श्राप दिया था कि तुम्हारा अंडकोष गिर जाये.
तब अग्नि देवता के कहने पर इंद्र को बकरे का अंडकोष लगाया गया. (बालकांड 49/8)
(देखे संपुर्ण कथा वाल्मिकी रामायण बालकांड 48,49)
-------
राणी को मृत घोडे का लिंग अपनी योनी मे डाल कर सभी पुरोहितो के सामने अश्लिल मंत्र बोलने पडते थे.
ये सब अश्वमेध यज्ञ के अंतिम चरण मे होता था.
यजुर्वेद महिधर भाष्य मे इसका विस्तार से उल्लेख है
______
ब्रह्माने त्याच्या मुलीवर बलात्कार केल्याचे पुरावे 6 वेगवेगळ्या ग्रंथातुन
बरेच कट्टर हिंदु ब्रह्मा ने त्याच्या मुलीवर बलात्कार केल्याचे पुरावे मागत असतात त्यांच्या साठी हि पोस्ट.
#ऋग्वेद
ऋग्वेद नुसार
अपनी सुंदरी कन्या उषा के शरीर में ब्रह्मा व प्रजापति ने उस वीर्य का सेक किया।जिस समय पिता युवती कन्या के ऊपर रातिकामी हुआ aur दोनो का समागम हुआ । और जिस समय पिता ने अपनी कन्या उषा के साथ संभोग किया.....।( ऋग्वेद,मंडल 10 ,सुक्त 61,मंत्र 5- 7, सायन भाष्य, अनुवाद रामगोविंद त्रिवेदी वेदांतशास्त्र,)
#शतपत_ब्राह्मण
शतपत ब्राह्मण नुसार
प्रजापति जिसे दयानंद सरस्वती ने वैदिक ईश्वर माना है वो अपनी लड़की उषा पर मोहित हो गया और sex कि इच्छा हुई तो sex भी कर लिया अपनी बेटी से।देवताओं के लिए ये पाप था के वैदिक ईश्वर अपनी बेटी और हमारी बहन के साथ sex करे, इसलिए देवताओ ने रुद्र से कहा के इस पाप के लिए वैदिक ईश्वर को बाँध दो, जब रुद्र ने वैदिक ईश्वर को बींध दिया तो उस वैदिक ईश्वर का आधा वीर्य यानी sperm गिर गया(शतपत ब्राह्मण 1/7/4/1 - 3)
#ऐतरेय_ब्राह्मण
ऐतरेय ब्राह्मण नुसार
प्रजापति ने अपनी लड़की देख कर भार्या के रूप में सोचा वो प्रजापति अपनी पुत्री के पास गए।देवताओ ने jab देखा के प्रजापति कैसा बुरा कर्म करता है, ऐसा सोच कर देवताओ ने ऐसा पुरुष को खोजा जो प्रजापति को मार सके।तब सब देवताओ ne रुद्र को उत्पन्न किया जिसकेअंदर प्रजापति को मारने का सामर्थ था(ऐतरेय ब्राह्मण,अध्याय3,खंड 9)
#बृहदारण्यकोपनिषद
बृहदारण्यकोपनिषद नुसार
स्त्री ने सोचा के कैसे मुझको अपने शरीर से उत्पन कर पुत्री रूपमुझसे संभोग करता है, ऐसा सोच कर वो छिपने के लिए गाय बन गईऔर पिता बैल बन कर संभोग किया जिससे गाय पैदा हुई।इसी तरह कन्या अलग अलग रूप में छिपती रही और पिता उसके साथ उन्ही रूप में संभोग करता रहा और अलग अलग प्राणियों को जन्म देता रहा(बृहदारण्यक उपनिषद, अध्याय 1, ब्रह्मण 4, श्लोक4)
#भागवत_पुराण
भागवत पुराण नुसार
ब्रह्मा की कन्या सरस्वती बड़ी सुंदर थी, उसे देख कर ब्रह्मा काममोहित हो गए।उनका ऐसा अधर्म देख कर उनके पुत्र ने समझाया के आप अपनी पुत्री से संभोग करने का पाप कैसे कर सकते है(श्रीमदभगवद महापुराण, स्कन्द 3 ,अध्याय 12, श्लोक 28 - 31)
#मत्स_पुराण
मत्स पुराण नुसार
ब्रह्मा ने अपने शरीर से अपनी पुत्री को उत्पन्न किया और अपनी पुत्री की सुंदरता को देख कर बार बार देखने लगे और तारीफ करने लगे।ब्रह्मा को अपनी पुत्री की सुंदरता के सिवा कुछ नही दिखता था।वो कामदेव से मोहित हो गए थे।तब ब्रह्मा ne अपने सारे पुत्रो को प्रजाओं की रचना करने भेज दिया और अपनी पुत्री से संभोग किया और उस संभोग से उनका पुत्र मनु पैदा हुआ (मत्स्य पुराण, अध्याय 3, श्लोक32- 45)
नोट: काही वैदिक ग्रंथामध्ये ब्रह्माला प्रजापती म्हणलेले आहे.
///////////////////////////////////
तर वरील सर्व पुराव्यावरुन सिद्ध आहे कि ब्रह्माने त्याच्या मुलीवर बलात्कार केला होता.
काही लोकं म्हणतील कि हि इंग्रज मैक्समुलर ने केलेली मिलावट केलेली मिलावट आहे पण त्याच्या आधीच ज्योतिबा फुलेंनी ब्रह्माला बेटीचोद म्हणलेलं आहे.
_______
ओम् शब्द: वास्तव आणि भ्रम
संघी मनुवादी ओम् शब्दाबद्दल अनेक दुष्प्रचार करत आहे.
कोणी म्हणत आहे सुर्यातुन ओम् ध्वनी येत आहे हे नासाने पण मान्य केलं आहे.
कोणी म्हणत आहे ओम् शब्दाचा उच्चार केल्यावर शरीरात उर्जा तयार होते.
कोणी म्हणत आहे नासा ओम् शब्दावर संशोधन करत आहे.
परंतु हे नक्की खर आहे का ?
का भोळ्या मंदबुध्दी कट्टर हिंदुच्या मनात जाती धर्माचा अहंकार निर्माण करण्याच एक षडयंत्र.
तैत्तिरिय उपनिषद् मधिल शीक्षा वल्ली अष्टक अनुवाक मध्ये ओम् शब्दाबद्दल आहे कि 👇
जब हम किसी बात का अनुमोदन करते है, यह कहना हो कि यह ठीक है 'ओम् इति' कहते है,जब आचार्य से कहते है कि कुछ उपदेश दे तो वह ठिक है (ओम् इति) ऐसा कह कर हि उपदेश देता है.
यज्ञ मे मंत्रो को ऋत्त्विक् 'ओम्' कह कर हि पढते है.
ब्रह्मा नामक ऋत्त्विक् ओम् कहकर ही यज्ञ कर्म करने की अनुमती देता है.
और अध्ययन के लिए उद्दत ब्राह्मण 'ओम' कह कर ही वेद का अध्ययन करता है.
(तैत्तिरिय उपनिषद् 1/8)
अशा प्रकारे अष्टम अनुवाक मध्ये ओम् शब्दाच्या उपयोगाबद्दल सविस्तर वर्णन आहे.
तैत्तिरिय उपनिषद् वरुनच सिद्ध आहे कि ओम् शब्द हा होकारार्थी शब्द म्हणून वापरला जात असे आणी यज्ञच्या वेळी किंवा इतर धार्मिक विधी सुरू करण्याच्या वेळी वापरला जाणारा शब्द आहे.
संस्कृत भाषेचे विद्वान सुरेंद्र अज्ञात ओम् शब्दाबद्दल म्हणतात कि 👇
ओम् (अ+उ+म्) वस्तुतः एक ध्वनी है जिसे मनमाने अर्थ देने के प्रयास किए गए है. संस्कृत में यह स्वीकृती देने का वाचक अव्यय भी है 'ओमिति ब्रुमः
यह बुलाए जाने पर प्रत्युत्तर में हां कहने का भी वाचक है- हे राम, ओम् (हां)
(श्रीमद्भगवदगीता, सुरेंद्र अज्ञात, पृष्ठ 544 )
छांदोग्य उपनिषद् मध्ये आहे कि 👇
अध्वर्यु ( यज्ञ का पुरोहित) 'ओम' कह कर आश्रावण कर्म शुरु करता है, ओम् कह कर ही उद्-गाता उद्-गान करता है.
(छांदोग्य उपनिषद् 1/1/9)
छांदोग्य उपनिषद् वरुनही सिद्ध आहे कि ओम् यज्ञाच्या वेळी मंत्र सुरु होतांना वापरला जाणारा शब्द आहे.
गितामध्ये आहे कि 👇
परमेश्वराची प्राप्ती करण्यासाठी शास्त्रोक्त विधिविधानांनुसार यज्ञ, दान आणी तप करणारे ब्रह्मवादी, या क्रियांचा ओम् पासुन आरंभ करतात.
(गिता 17/24)
///////////////////////////////////////
अंतः हे सिद्ध आहे कि ओम् हा होकारार्थी आणी यज्ञ-कर्माची सुरवात करतांना वापरला जाणारा शब्द होता.
मला वाटत हे तसच आहे जस 90s च्या अनेक गाण्यांची सुरवात ला ला ला किंवा हे हे हे पासुन होते.
ओम् शब्दाच पण तेवढंच महत्व आहे.
हा यज्ञाच्या वेळी मंत्र सुरु होताना वापरला जाणारा शब्द होता.
याच आणखी काही महत्त्व नाही.
संघी म्हणत असतात ओम् शब्दाने शरीरात उर्जा तयार होते.
नासा ओम् शब्दावर संशोधन करत आहे,यात काहीही तथ्य नाही.
आपल्या विचारसरणीच्या वेबसाईटच्या आधारे संघी मनुवादी ओम् शब्दाबद्दल सोशल मिडियावर खोटी माहिती वायरल करत असतात.
हे भोळ्या मंदबुध्दी कट्टर हिंदुच्या मनात जाती धर्माचा अहंकार निर्माण करण्याच एक षडयंत्र आहे.
______
#विरोधाभासी_मनु
मनुस्मृति कितनी पुरानी पुस्तक है यह तो मै शायद नही बता सकता, पर इतना जरूर कह सकता हूँ कि यह ग्रंथ रामायण और महाभारत से प्राचीन है!
मनुस्मृति मे कहीं भी राम और कृष्ण का कोई उल्लेख नही है, परन्तु रामायण के किष्किंधाकाण्ड मे राम ने स्वयं मनुस्मृति की प्रशंसा की है, तो महाभारत के शान्तिपर्व और अनुशासन पर्व मे भीष्म पितामह ने इस ग्रंथ का गुणगान किया है!
मनुस्मृति निश्चित ही किसी काल मे सनातन धर्म की सबसे मान्य पुस्तक थी, लेकिन इस किताब मे मनु ने कई श्लोक ऐसे लिखे हैं, जो उन्ही के अन्य श्लोकों का ठीक उलट है!
आइऐ, कुछ ऐसे ही श्लोकों पर नजर डालते हैं-
मनुस्मृति-3/56 मे मनु ने नारियों के सम्मान मे यह बड़ी बात कही है-
"यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः
यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः।।"
अर्थात- जहाँ नारियों की पूजा होती है, वहाँ देवताओं का वास होता है, और जहाँ नारियाँ कष्ट पाती है, वहाँ समृद्धि नही होती!
यहाँ तो मनु ने बड़ी उत्तम बात लिखी, पर नौवां अध्याय शुरू होते ही मनु कहते हैं कि नारियों को स्वतंत्रता मत दो, नारियां कामुक होती है!
यही नही मनु ने अध्याय-8/371 मे लिखा है-
"भर्तारं लङ्घयेद्या स्त्री ज्ञाति गुणदर्पिता।
तां श्वाभिः खादयेद्राजा संस्थाने बहुसंस्थिते।।"
अर्थात- अपनी सुन्दरता और बाप-दादा के धन पर यदि स्त्री घमण्ड करे तो उसे सबके सामने कुत्ते से नोचवा डालें।
जरा सोचो कि पहले नारियों को पूजने की बात करने वाले मनु अब कुत्ते से नोचवाने की सलाह दे रहे है!
मनु का दूसरा विरोधाभास यह है कि उन्होने अध्याय-9/104 मे कहा है कि-
"ऊर्ध्वं पितुश्च मातुश्च समेत्य भ्रातरः समम् ।
भजेरन्पैतृकं रिक्थमनीशास्ते हि जीवतोः।।"
अर्थात- माता-पिता की मृत्यु के बाद सभी भाई धन-सम्पत्ति को बराबर-बराबर बांट लें, माता-पिता के जीते जी उन्हे धन बांटने का कोई अधिकार नही।
इस श्लोक मे मनु पैतृक सम्पत्ति मे सभी भाइयों को बराबर को अधिकार बता रहे हैं, पर इसका ठीक अगला ही श्लोक उन्होने लिखा और मनु अध्याय-9/105 मे लिखते हैं-
"ज्येष्ठ एव तु गृह्णीयान्पित्र्यं धनमशेषतः।
शेषास्तमुपजीवेयुर्यथैव पितरं तथा।।"
अर्थात- भाइयों मे जो सबसे श्रेष्ठ हो, वो पिता की सम्पूर्ण धन-सम्पत्ति को ग्रहण करे, शेष भाई उसे पितातुल्य मानकर उसके अधीन रहें!
अब ये पागलपन देखो.... पहले तो उन्होने सम्पत्ति मे सभी भाइयों का बराबर अधिकार बताया, पर अगले ही श्लोक मे कहा कि सारी सम्पत्ति बड़े भाई की है!
आगे मनु ने मनुस्मृति-8/123-124 मे लिखा है कि राजा केवल क्षत्रिय,वैश्य और शूद्र को दण्ड दे, क्योंकि स्वायम्भायु मनु ने जो दण्ड विधान बताया है, वह केवल इन्ही तीन वर्णों के लिये है, ब्राह्मण के लिये नही।
लेकिन कुछ आगे बढ़ते ही मनु की अक्ल फिर ठिकाने आयी और इसी आठवें अध्याय के श्लोक-337/338 मे मनु लिखते हैं कि यदि शूद्र चोरी करे तो उससे आठ गुना, वैश्य करे तो सोलह गुना, क्षत्रिय करे तो बत्तीस गुना और ब्राह्मण करे तो उसे चौंसठ गुना या एक सौ अट्ठाइस गुना दण्ड दें!
मनु केवल इतने ही विरोधाभासी नही थे! मनु के अनुसार मांस नही खाना चाहिये, अतः मांस खाने से रोकने के लिये मनु ने लोगों को डराया है और मनुस्मृति-5/55 मे लिखा है-
"मांस भक्षयिताऽमुत्र यस्य मांसमिहाद्म्यहम् ।
एतन्मांसस्य मांसत्व प्रवदन्ति मनीषिणः।।"
अर्थात- जो मनुष्य इस लोक मे जिसका मांस खाता है, परलोक मे वह उसका भी मांस खाता है, यही मांस का मांसत्व है।
लेकिन इसी अध्याय मे उन्होने मांस खाना अनिवार्य भी कहा है!
इसी अध्याय के श्लोक-5/35 मे मनु कहते हैं-
"नियुक्तस्तु यथान्यायं यो मांसं नात्ति मानवः।
स प्रेत्य पशुतां याति संभावनेकविंशशतिम् ।।"
अर्थात- जो विधि नियुक्त होने पर भी मांस नही खाता, वह मरने के बाद इक्कीस जन्म तक पशु होता है!
सोचों! कि मनु कैसे आदमी थे, पहले कह रहे हैं कि मांस नही खाओगे तो पशुयोनि मे जाओगे, और बाद बता रहे हैं कि तुम जिसका मांस खाओगे, वो तुम्हारा भी मांस खायेगा!
मनु ने इतनी ही नही, और भी कई विरोधाभासी बातें कही हैं, जैसे-
मनु ने मनुस्मृति-10/65 मे लिखा है-
"शूद्रो ब्राह्मणतामेति ब्राह्मणश्चैति शूद्रताम।"
अर्थात- अपने कर्मो से ब्राह्मण शूद्र और शूद्र ब्राह्मणत्व को प्राप्त होता है!
पर इसी अध्याय के श्लोक 10/73 मे मनु लिखते हैं कि ब्राह्मण और शूद्र कभी समान नही हो सकते, अर्थात यहाँ उन्होने वर्ण-परिवर्तन को नकार दिया है।
मनु के ऐसा लिखने के पीछे क्या कारण हो सकते है-
क्या वो बड़े भुलक्कड़ थे, पीछे क्या लिखा है, उसे भूलकर आगे ठीक उसका विपरीत लिख देते थे!
______
संडास करण्याबद्दल मनुस्मृति मधील विचित्र नियम
मनुबाबा ने संडास करताना काही विशिष्ट नियमांच पालन करण्याचा फतवा जारी केला आहे.
👇
तिरस्कृत्योच्चरेत्काष्ठलोष्ठपत्रतृणादिना...
नियम्य प्रयतो वाचं संवीतांगोsवगुंठित....
मुत्रोच्चारसमुत्सर्गं दिवा कुर्यादुदड्मुख....
दक्षिणाभिमुखो रात्रौ संध्यायोश्च तथा दिवा..
छायायामन्धकारे वा रात्रावहनि वा द्विज द्विज....
यथासुखमुखः कुर्यात्प्राणबाधाभयेषु च..
प्रत्यग्निं प्रतिसूर्यं च प्रतिसोमोदकद्विजान्...
प्रतिगां प्रतिवाचं प प्रज्ञा नश्यति मेहत.....
अर्थातः लकडी,मिट्टी,पत्ता,घास आदि से भूमी को ढक कर तथा चुप हो कर,सिर पर कपडा डाल कर (घुंघट सा निकाल कर) मलमुत्र त्याग करे.दिन मे तथा दोनो(प्रातःकाल और सायंकाल कि) संध्याओं मे उत्तर कि ओर मुंह कर के तथा रात्रि में दक्षिण की ओर मुंह कर के मलमुत्र त्याग करे.द्विज रात मे या दिन मे बादलों की छाया हो जाने पर अथवा कुहरे आदि से अंधेरा हो जाने पर और प्राणबाधा का भय होने पर जिस ओर चाहे मुंह कर के मलमुत्र त्याग कर सकता है. सर्य के सामने,चंद्रमा,जल,ब्राह्मण,गाय और हवा की ओर मुंह कर के मलमुत्र त्याग करने वाले कि बुद्धि नष्ट हो जाती है.
(मनुस्मृति: अध्याय 4,श्लोक 49 ते 52)
//////////////////////
कपडा डोक्यावर घेऊन संडास करण्यामागच काय वैज्ञानिक कारण आहे ?
सकाळी आणी संध्याकाळी उत्तर दिशेला तोंड करुन संडास करावी आणी रात्री दक्षिण दिशेला तोंड करुन संडास करावी, का
पुर्वेला किंवा पश्चिमेला तोंड केल्यावर संडास होणार नाही का ?
रात्री अंधार जास्त असल्यावर द्विज म्हणजे ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य कुठल्याही बाजुला तोंड करुन संडास करु शकतात...
बर.. शुद्र का नाही ?
सुर्य,चंद्र,पाणी,ब्राह्मण,गाय,हवा यांच्याकडे तोंड करुन संडास केल्यावर बुद्धी नष्ट होते...
बर ठिक आहे पण जर एखाद्याला जर जुलाब होत असतील तर समोर सुर्य,चंद्र,पाणी,ब्राह्मण,गाय आहे का नाही हा विचार करु पर्यंत चड्डीतच जुलाब होण्याची शक्यता आहे.
मंग मनुस्मृति समर्थक कधी पासुन हे नियम पाळायला सुरवात करताय.
______
वाल्मिकी शुद्र होते का ?
वाल्मिकी बद्दल अनेक भ्रम संघी मनुवादी पसरवत आहे.
वर्ण व्यवस्था जन्माच्या आधारे नसुन कर्माच्या आधारे होती.
वाल्मिकी जन्माने शुद्र होते आणी कर्माने ब्राह्मण अस संघी मनुवादी लोकांच म्हणन आहे.
परंतु हे नक्की खर आहे का ?
का 21 व्या शतकात आपल्या धर्माची इज्जत वाचवण्यासाठी केलेला एक अयशस्वी प्रयत्न?
वाल्मिकी ने रामायणामध्ये दोन ठिकाणे आपला परिचय दिला आहे.
हे राम मै प्रचेता का दसवां पुत्र हु.
(वाल्मिकी रामायण उत्तरकांड 96/11)
यह आख्यान भविष्य और उत्तरसहित प्रचेता के पुत्र ने रचा है, जिसका ब्रह्म ने भी समर्थन किया है.
(उत्तरकांड 111/11)
वाल्मिकी चे वडिल प्रचेता कोण ?
मनुस्मृति मध्ये त्यांना ब्रह्मांचा पुत्र म्हणले आहे.
ब्रह्मा ने मरीचि,अत्रि,अंगिरा,पुलसत्य,पुलह,क्रतु,प्रचेता,वासिष्ठ,भृगु आणी नारद या 10 पुत्रांना उत्पन्न केले.
(मनुस्मृति 1/35)
ब्रह्माचे 10 ब्राह्मण पुत्रापैकी एक प्रचेता हे वाल्मिकीचे पिता होते.
स्पष्ट आहे कि वाल्मिकी हे जन्माने ब्राम्हण होते.
सुरेंद्र अज्ञात अध्यात्म रामायणाचा संदर्भ देऊन लिहीतात 👇
अध्यात्म रामायण नामक एक अन्य ग्रंथ मे वाल्मिकी ने अपने विषय मे बताया है कि मै जन्म से द्विज(ब्राह्मण) था परंतु किरातों (शुद्रो व भिलों) के संपर्क के कारण मै चोर बन गया था. बाद मे पुनः ब्राह्मण के काम करने लगा.
(अध्यात्म रामायण,अयोध्याकांड,सर्ग 92)
रामायण या सितायन? सुरेंद्र अज्ञात, पृष्ठ 20
स्कंदपुराणात वाल्मिकी ला श्रीवत्सगोत्रीय ब्राह्मण म्हणलेल आहे.
तिनही ग्रंथात कथा वेगवेगळ्या असल्या तरी तिनही ग्रंथ यावर एकमत आहे कि वाल्मिकी जन्माने ब्राम्हण होते.
वाल्मिकी शुद्र होते अस वाक्य आपल्याला कुठल्याही ग्रंथात सापडत नाही.
अंतः सिद्ध आहे कि तथाकथित शुद्र वाल्मिकी कर्माने ब्राह्मण झाले नसुन जन्मापासुनच ब्राह्मण होते.
_____
ताडना शब्दाचा खरा अर्थ
#भुमिका
तुलसिदास रामायणात एक 'चौपाई' आहे
ढोल गंवार शुद्र पशु नारी ये सब ताडन के अधिकारी
(सुंदरकांड 61/3)
यावर दलित,मुलनिवासी,बहुजन,फेमिनिस्ट,बुद्धीवादी,नास्तिक,पुरोगामी,इत्यादी सर्व आक्षेप घेत असतात.
त्यामुळे धर्माची इज्जत वाचवण्यासाठी संघी मनुवादी,कथावाचक बाबा पंडे-पुरोहित यांनी एक युक्ती शोधली आहे ताडन शब्दाचा मनमानी अर्थ लावुन सामान्य लोकांना भ्रमित करने.
यावर अनेक युट्युब व्हिडीओ आहे.
लेख लिहले गेले आहे. Facebook whats app वर अनेक काॅपी पेस्ट पण वायरल आहे.
त्यामुळे व्यापक स्तरावर झालेल्या या दुष्प्रचाराची समिक्षा करने मला महत्त्वाचे वाटले.
#आप्टे_कोश
आप्टे संस्कृत-हिंदी कोश नुसार ताडन शब्दाचा अर्थ आहे 👇
मारने-पीटने की क्रिया या भाव 2. किसी को दिया जाने वाला दुख या कष्ट 3. किसी को उत्पीड़ित या परेशान करने की क्रिया 4. प्रहार; आघात। [क्रि-स.] 1. भाँपना; छिपी हुई बात समझना 2. सुधार के उद्देश्य से सज़ाया दंड देना 3. किसी को अपशब्द कहना 4. कष्ट देना।
#नालंदा_विशाल_शब्दसागर
नालंदा विशाल शब्द सागर(पृष्ठ 510) नुसार
ताडना(संज्ञा,स्त्री) 1.मार,प्रहार 2.डांट डपर,दंड शासन,धमकी 3.उत्पिडन कष्ट 4. मारपिट कर भगाना 4. कष्ट पहुंचाना
यावरुन हे सिद्ध आहे कि ताडना म्हणजे मारहाण करण्याशीच संबंधीत आहे याचा वेगळा अर्थ लावुन सत्य बदलणार नाही.
कारण रामचरित्रमानस मध्ये स्त्री शुद्राचा द्वेष इतर ठिकाणी पण आहे.
#इतर_कांड
बालकांड मध्ये तुलसिदास लिहतात
नारी स्वभाव से हि मुर्ख और नासमज होती है
(बालकांड 143/2)
स्त्री स्वभाव से हि अपवित्र होती है
(अरण्यकांड 6)
नारी अवगुणो कि जड पिडा देने वाली और सब दुखों कि खान है
(अरण्यकांड 55)
नारी स्वतंत्रता के पात्र नही.
(किष्किंधाकांड 16/4)
नारी का ह्रदय कपटों पापों और अवगुणों कि खान है.
(अयोध्याकांड 162/2)
#शुद्र_द्वेष
तुलसिदास शुद्र जातींबद्दल लिहतात
तेली कुंभार श्वपच किरात कलार आदि निच वर्ण है
(उत्तरकांड 157/3)
शुद्र यदि गुणवान और ज्ञानी भी हो तो भी उसका पुजन नही करना चाहिए.
(अयोध्याकांडा 40/1)
संसार मे एक ही पुण्य है, मन कर्म वचन से ब्राह्मणों कि पुजा.
(उत्तरकांड 67/4)
शुद्र कलियुग मे ब्राह्मणों को उपदेश दे रहे है और जनेऊ पहनकर दान ले रहे है जिसके वे पात्र नही.
(उत्तरकांड 99(ख) 1)
//////////////////////////////////
#निष्कर्ष
ताडन शब्दाचा अर्थ बदलण्याचा प्रयत्न करणारयांचा यावर काय मत आ?
स्त्री शुद्र द्वेष तर रामचरित्रमानस मध्ये इतर ठिकाणी पण आहे.
धर्माची इज्जत वाचवण्यासाठी आता कुठल्या कुठल्या शब्दाचा अर्थ बदलणार ?
ताडन शब्दाचा अर्थ बदलण्याचा प्रयत्न करणे म्हणजे 21 व्या शतकात कालबाह्य धर्माची इज्जत वाचवण्यासाठी केलेला एक अयशस्वी प्रयत्न आहे.
संघी मनुवादी कथावाचक बाबा पंडे पुरोहित यांची समजदारी यातच आहे कि त्यांनी प्रामाणिकपणे सत्य स्विकार करावे.
______
राम सेतुचा भांडा फोड......
रामायणाला ऐतिहासिक सिद्ध करण्यासाठी कट्टर हिंदुचा पहिला पुरावा असतो तो म्हणजे राम सेतु. कट्टर हिंदुच म्हणने आहे कि हा सेतु रामाने लंकेत जाण्यासाठी बांधला होता....
परंतु हे नक्की खरं आहे का ?
मुळात राम सेतु हा शब्दच कुठल्या ग्रंथात सापडत नाही.
वाल्मिकी रामायणात ज्या सेतुचा उल्लेख आला आहे त्याच नाव राम सेतु नसुन नलसेतु आहे कारण तो रामाच्या सांगण्यावरुन नल नावाच्या वानराने आणी इतर वानरांनी बांधला.
संगमं च समुद्रस्य नलसेतोश्च बंधनम
अर्थात : राम वहा पहुंचकर समुद्र के संगम का दर्शन करते है और नलसेतु बनवाते है.
(वाल्मिकी रामायण : 1/3/34)
रामायणातुनच हे सिद्ध आहे कि ज्याला कट्टर हिंदु रामसेतु म्हणत आहे तो एक नल सेतु आहे.
आता नलसेतुच वर्णन पहा रामायणात.
दश्योजनविस्तिर्ण शतयोजनमायतम् दद्टशुदर्देवरांधर्वाः नलसेतुं सुदुष्करम्
अर्थात : वानरो ने पहले दिन 14 योजना,दुसरे दिन 20 योजना,तिसरे दिन 21 योजना,चौथे दिन 22 योजना,पाचवे दिन 23 योजना लंबा पुलं बांधा.इस तरह नल ने 100 योजना अर्थात 1288 किलोमीटर लंबा पुलं तयार किया.
पुलं 10 योजना अर्थात 128 किलोमीटर चौडा था.
इस नल द्वारा निर्मीत नलसेतु को देखने देवता और गंधर्व आहे.
(वाल्मिकी रामायण : 6/22/76)
(संस्कृत मधिल 1 योजना म्हणजे 8-9 मैल होय.)
रामायणात ज्या सेतुची चर्चा केली आहे तो सेतु 1288 किलोमीटर लांब आणी 128 किलोमीटर रुंद आहे.
आता याउलट वास्तविक सेतुची लांबी हि फक्त 30 किलोमीटर लांब आहे आणी 10 फुट रुंद आहे.
30 किलोमीटर आणी रामायणातील 1288 किलोमीटर लांबीचा सेतु मध्ये जमिन आसमानचा फरक आहे.
उरलेला 1258 किलोमीटर लांबीचा सेतु कुठे गायब झाला याच उत्तर कट्टर हिंदुकडुन अपेक्षीत आहे.
वास्तविक सेतु आणी रामायणात वर्णन केलेल्या सेतुची तुलना केल्यावर आपल्या सहज लक्षात येईल कि दोन्ही सेतुंचा एकमेकांशी काहीही संबंध नाही.
/
/
पाण्यावर तरंगणारया दगडांच रहस्य काय आहे ....??
उज्जैन सायन्स काॅलेजचे माजी विभागाध्यक्ष डाॅ आर एन तिवारीच्या मते ज्वालामुखी नंतर लावा जमा झाल्यानंतर असे दगडं तयार होतात,त्यांची घनता कमी असल्यामुळे ते पाण्यावर तरंगु शकतात.
या दगडांना प्युमिस स्टोन म्हणल जातं.
अंततः हे ही सिद्ध आहे कि राम नावाचा तरंगणारया दगडांशी काहीही संबंध नाही.
====================
वरील काही मुद्यांमध्ये आपण कट्टर हिंदुच्या भ्रामक प्रचाराचा भांडा फोड केला आहे.
पण कट्टर हिंदु एक गोष्ट खरी सांगतात प्राचीन भारताच विज्ञान खुप विकसीत होतं.
1288 किलोमीटर आणी 128 किलोमीटर रुंदीचा पुलं फक्त 5 दिवसात ते पण फक्त माकडांच्या सहाय्याने 😨😨😨
_____
गुरुकुल व्यवस्था: वास्तव आणि भ्रम
संघी मनुवादी,आर्य समाजी अनेक वर्षांपासून दुष्प्रचार करत आहे कि इंग्रज भारतात येण्याआधी आपल्या देशात लाखो गुरुकुल होते.
त्यात ज्ञान,विज्ञान,तत्वज्ञान,गणित असे 18-20 विषय शिकवले जायचे.
जे काही शोध मध्यकाळात आणी आधुनिक काळात लागले आहे.
ते सर्व आमच्या ऋषींना आधीच माहिती होत.
आणि ते सर्व गुरुकुलात शिकवलं जायच.
परंतु हे नक्की खर आहे का ?
का भोळ्या मंदबुध्दी कट्टर हिंदुच्या मनात जाती धर्माचा अहंकार निर्माण करण्याच एक षडयंत्र आहे ?
गुरुकुलात काय शिकवल जायच हे उपनिषद् मधिल काही प्रसंगावरुन आपल्या लक्षात येईल.
#प्रश्नोपनिषद्
प्रश्नोपनिषद् मध्ये सुरवातीलाच एक प्रसंग आहे कि
6 लोकं ऋषी पिप्पलाद कडे जातात.
ते परब्रह्माच्या शोधात असतात.
ऋषी पिप्पलाद त्यांना म्हणाले 👉 तुम्ही 1 वर्ष ब्रह्मचर्याच पालन करुन तपश्चर्या करा आणि 1 वर्ष इथेच रहा.
नंतर प्रश्न विचारा.
जर मला उत्तर माहिती असेल तर सांगेल. -यदि विज्ञास्याम: सर्वं ह वो वक्ष्यामः
(प्रश्नोपनिषद् 1/2)
समिक्षा: या प्रसंगावरुन लक्षात येतं कि संघी आणी आर्य समाजी सांगतात त्या प्रमाणे गुरुकुल मध्ये विज्ञान शिकवल जात नसुन काल्पनिक ब्रह्म विषयक उपदेश दिले जात होते.
#केनोपनिषद्
केनोपनिषद् मध्ये तर एक हास्यास्पद प्रसंग आहे
गुरुने उपदेश दिल्यानंतर शिष्य म्हणतात कि आता आम्हाला उपनिषदाचा उपदेश द्या,ब्रह्मविद्याचा उपदेश द्या-उपनिषद् भो ब्रुहि (केनोपनिषद् 4/7)
गुरु म्हणतात मी तुम्हाला ब्रह्मविषयक विद्या सांगितली आहे.
जो उपदेश दिला आहे तो उपनिषदाचाच होता.- त उपनिषद् ब्राह्मीं वाव त उपनिषद्मब्रुमेति
(केनोपनिषद् 4/7)
समिक्षा: यावरुन हे सिद्ध होत कि गुरुकुलातील आचार्यांची शिकवण्याची पद्धत इतकी वाईट होती कि विद्यार्थ्यांना लक्षातही येतं नव्हत कि गुरुजी ब्रह्म विषयी उपदेश करत आहे.
ज्यांना काल्पनिक ब्रह्म विषयी उपदेश नीट देता येत नव्हता ते काय विज्ञान शिकवणार आपल्या गुरुकुलात.
#छांदोग्य_उपनिषद्
छांदोग्य उपनिषद् मध्ये हि गुरु शिष्यांचा एक प्रसंग आहे.
हारिद्रुमत गौतम सत्यकामच उपनयन संस्कार करुन त्याला आपल शिष्य बनवतो.
शिष्य बनवल्यावर गौतम त्याला काही शिकवत नाही तर 400 गाई सांभाळायला सांगतो.
कृशानामबलानां चतुःशता गा निराकृत्योवाचेमाः सोम्यानुसंव्रजेति
(छांदोग्य उपनिषद् 4/4/5)
समिक्षा: वाह रे...! गुरु शिष्य परंपरेचा तथाकथित गौरवशाली इतिहास.
सत्यकामच शिष्य बनुन काय फायदा झाला ?
कोणत ज्ञान मिळालं त्याला.
शिष्य बनवल्यानंतर गौतम ने त्याला स्वतःच्या गाई चरवायला सांगितल्या पण ज्ञान दिल नाही.
खर तर गौतम ने शिष्य बनवण्याच्या नावाखाली सत्यकामला आपल नोकर बनवल होत.
ज्यांना गुरु शिष्य परंपरेवर गर्व आहे त्यांनी या कथेबद्दल विचार करावा.
==========
छांदोग्य उपनिषद् मध्येच पुढे आहे सत्यकाम नंतर आचार्य बनतो
उपकोसल नावाचा त्याचा शिष्य 12 वर्ष त्याच्यासाठी इंधन गोळा करत असतो.
ज्यापासुन सत्यकाम इंधन पेटवेल आणी हवन करेल.
परंतु सत्यकाम आपल्या शिष्यांला कोणताही उपदेश देत नाही.
उपकोसल ने 12 वर्ष अग्नी साठी इंधन गोळा केलेल असतं त्यामुळे अग्नी कडुन त्याला ब्रह्म विषयी उपदेश मिळतो.
(छांदोग्य उपनिषद् 4/10/ श्लोक 2,3,4)
समिक्षा: मला तर हि गुरु-शिष्य परंपरा नाही तर मालक नोकर परंपरा वाटत आहे. शिष्य बनवल्यानंतर उपदेश तर दिला नाही पण 12 वर्ष इंधन गोळा करण्याच काम मात्र लावुन दिल.
हि गुरुकुल व्यवस्था म्हणजे भोळ्या मंदबुध्दी लोकांकडुन आपली व्यक्तीगत कामे करुन घेण्याच एक षडयंत्र होत.
ज्या ऋषींना महाज्ञानी म्हणलं जात त्यांची प्राचिन काळात काय अवस्था होती हे मनुस्मृतिच्या दोन श्लोकांवरुन लक्षात येतं
भुख लागल्यानंतर वामदेव ऋषि कुत्र्याच मास खाण्यासाठी तयार झाले होते.
(मनुस्मृति 10/106)
भुख लागल्यानंतर ऋषि विश्वमित्र चांडाळाच्या हाताने कुत्र्याच मास खाण्यासाठी तयार झाले होते.
(मनुस्मृति 10/108)
समिक्षा: वाह रे...! ऋषी मुनींचा गौरवशाली इतिहास.
खायला वेळेवर मिळत नव्हत आणि म्हणे गूरुकुलात विज्ञान शिकवत होते.
प्राचीन ऋषी खरच एवढे ज्ञानी होते तर त्यांना अस वाईट अवस्थेत का जगाव लागल ?
//////////////////////////////////
अंतः सिद्ध आहे कि गुरुकुलातील ऋषी हे कोणतही विज्ञान गणित शिकवत नसुन काल्पनिक ब्रह्म आणी काल्पनिक आत्माचा उपदेश देत होते.
काल्पनिक ब्रह्म विषयक उपदेश देण्याच्या नावाखाली आचार्य शिष्यांकडुन स्वतःची व्यक्तीगत कामे करुन घेत.
गाई संभाळणे,पाणी भरणे,लाकूड तोडणे,इत्यादी.
खर तर हि गुरुकुल व्यवस्था भोळ्या मंदबुध्दी लोकांकडुन आपली व्यक्तीगत सेवा करुन घेण्याच एक षडयंत्र होत.
संघी आणी आर्य समाजी जे म्हणत असतात कि आमचे महाज्ञानी ऋषी गुरुकुलात विज्ञान गणितासह 18-20 विषयांच ज्ञान देत होते यात काहीही तथ्य नाही.
संघी आणी आर्य समाजी गुरुकुल व्यवस्थेबद्दल खोटी माहिती वायरल करत असतात.
हे भोळ्या मंदबुध्दी कट्टर हिंदुच्या मनात जाती धर्माचा अहंकार निर्माण करण्याच एक षडयंत्र आहे.
______
वाल्मिकी शुद्र होते का ?
वाल्मिकी बद्दल अनेक भ्रम संघी मनुवादी पसरवत आहे.
वर्ण व्यवस्था जन्माच्या आधारे नसुन कर्माच्या आधारे होती.
वाल्मिकी जन्माने शुद्र होते आणी कर्माने ब्राह्मण अस संघी मनुवादी लोकांच म्हणन आहे.
परंतु हे नक्की खर आहे का ?
का 21 व्या शतकात आपल्या धर्माची इज्जत वाचवण्यासाठी केलेला एक अयशस्वी प्रयत्न?
वाल्मिकी ने रामायणामध्ये दोन ठिकाणे आपला परिचय दिला आहे.
हे राम मै प्रचेता का दसवां पुत्र हु.
(वाल्मिकी रामायण उत्तरकांड 96/11)
यह आख्यान भविष्य और उत्तरसहित प्रचेता के पुत्र ने रचा है, जिसका ब्रह्म ने भी समर्थन किया है.
(उत्तरकांड 111/11)
वाल्मिकी चे वडिल प्रचेता कोण ?
मनुस्मृति मध्ये त्यांना ब्रह्मांचा पुत्र म्हणले आहे.
ब्रह्मा ने मरीचि,अत्रि,अंगिरा,पुलसत्य,पुलह,क्रतु,प्रचेता,वासिष्ठ,भृगु आणी नारद या 10 पुत्रांना उत्पन्न केले.
(मनुस्मृति 1/35)
ब्रह्माचे 10 ब्राह्मण पुत्रापैकी एक प्रचेता हे वाल्मिकीचे पिता होते.
स्पष्ट आहे कि वाल्मिकी हे जन्माने ब्राम्हण होते.
सुरेंद्र अज्ञात अध्यात्म रामायणाचा संदर्भ देऊन लिहीतात 👇
अध्यात्म रामायण नामक एक अन्य ग्रंथ मे वाल्मिकी ने अपने विषय मे बताया है कि मै जन्म से द्विज(ब्राह्मण) था परंतु किरातों (शुद्रो व भिलों) के संपर्क के कारण मै चोर बन गया था. बाद मे पुनः ब्राह्मण के काम करने लगा.
(अध्यात्म रामायण,अयोध्याकांड,सर्ग 92)
रामायण या सितायन? सुरेंद्र अज्ञात, पृष्ठ 20
स्कंदपुराणात वाल्मिकी ला श्रीवत्सगोत्रीय ब्राह्मण म्हणलेल आहे.
तिनही ग्रंथात कथा वेगवेगळ्या असल्या तरी तिनही ग्रंथ यावर एकमत आहे कि वाल्मिकी जन्माने ब्राम्हण होते.
वाल्मिकी शुद्र होते अस वाक्य आपल्याला कुठल्याही ग्रंथात सापडत नाही.
अंतः सिद्ध आहे कि तथाकथित शुद्र वाल्मिकी कर्माने ब्राह्मण झाले नसुन जन्मापासुनच ब्राह्मण होते.
______
वैदिक मत आणी स्त्री
(वेदांमध्ये)
#भुमिका
21 व्या शतकात कालबाह्य ग्रंथाची इज्जत वाचवण्यासाठी पुरातनवादी लोकं त्यांच्या कालबाह्य ग्रंथातुन सर्व प्रकारचे आधुनिक विचार दाखवण्याचे प्रयत्न करतात त्यातील एक म्हणजे स्त्रीयांविषयी वैदिक मताचे नियम.
पुरातनवादी लोकांच म्हणन आहे कि आमच्या ग्रंथात स्त्रीयांविषयी काहीही वाईट लिहलेल नाही जे काही आक्षेपार्ह ते चुकिच्या अर्थामुळे किंवा मिलावट झाल्यामुळे वाटत आहे.
परंतु हे सर्व दावे नक्की खरे आहे का?
का भोळ्या मंदबुध्दी कट्टर हिंदुच्या मनात जाती धर्माचा अहंकार निर्माण करण्याच एक षडयंत्र ? पाहुया...
#ऋग्वेद
ऋग्वेद 8-33-17 नुसार स्त्रीयांना बुद्धी कमी असते
इंद्रने हि कहा था कि स्त्री के मन का शासन करना असंभव है,स्त्री कि बुद्धी छोटी होती है
(ऋ. 8-33-17)
सायणभाष्य,रामगोविंद त्रिवेदी पृष्ठ 972
#पिता_पुत्री_संभोग
वेदांमध्ये पितापुत्री संभोगाचा देखील उल्लेख आहे.
पिता यत्स्यां दुहितरमधिष्कन्क्षमयारेतः संजग्मानो नि षिंचत् स्वाध्यो जनयन्ब्रह्म देवा वास्तोष्पतिं व्रतपां निरतक्षन
अर्थात : जब पिता ने पुत्री के साथ संभोग किया पृथ्वी के साथ मिलकर उस समय विर्य सिंचा और सुकृती देवो ने इस से व्रतरक्षक(रुद्र) देवता का निर्माण किया
(ऋग्वेद 10-61-7)
अथर्ववेदात आहे कि
यस्त्वा स्पप्ने निपद्यते भ्राता भृत्वा पितेव च बजस्तान्त्सहतामितः क्लिबरुपांस्तिरिटीनः
अर्थातः तेरे सो जाने पर यदि तेरा भाई और पिता तेरे साथ संभोग करते है तो हम दोनो को नपुंसक बना कर मार डालेंगे
(अथर्ववेद 8-6-7)
या मंत्रावरुन लक्षात येत आहे कि एक आर्या स्त्री तिच्या वडील आणि भावाच्या कामुक वृत्तीमुळे दुःखी आहे. ति एका व्यक्तीजवळ आपल दुःख व्यक्त करत आहे. आणी तो व्यक्ती तिला वडिल आणि भावाच्या लैगिंक अत्याचारातुन मुक्त करण्याच आश्वासन देत आहे. यावरुन सिद्ध आहे कि आर्य स्त्रिया त्यांच्या वडील आणि भावापासुन सुद्धा सुरक्षित नव्हत्या.
ऋग्वेद 5-30-9 नुसार शत्रूच्या स्त्रीयांना रखेल बनवलं जात असे
इंद्र ने असुर कि दो प्रयसी स्त्रीयो को अपने घर मे रख लिया.
(ऋ. 5-30-9)
रामगोविंद त्रिवेदी
#ऋग्वेद_दयानंद_भाष्य
ऋग्वेदानुसार आर्य स्त्रिया 11 पुरुषांबरोबर सेक्स करुन 11 मुलांना जन्म देत असे
स्वामी दयानंद ऋग्वेद 10-85-40 वर भाष्य करतांना म्हणतात
इस मंत्र मे ग्यारावे पुरुष तक स्त्री नियोग कर सकती है,वैसे पुरुष भी ग्यारावी स्त्री तक नियोग कर सकता है.
(ऋ. 10-85-40 वर दयानंद भाष्य)
(सत्यार्थ प्रकाश,चतुर्थ समुल्लास)
स्वामी दयानंद यांच्या या भाष्यावरुनच सिद्ध आहे कि वैदिक सभ्यतेत स्त्रीला फक्त मुल जन्माला घालण्याची मशीन समजलं जात असे.
स्वामी दयानंद निरुक्तच्या आधारे देवर(दिर) शब्दाचा अर्थ सांगतांना लिहतात.
देवर स्त्री का द्वितीया वर है
(ऋग्वेद-आदी भाष्य भुमिका,नियोग प्रकरण)
स्वामी दयानंद ऋग्वेद 10-18-8 नुसार हे सिद्ध करतात कि विधवा स्त्री देवर(दिर) बरोबर नियोग करुन संतान उत्पन्न करु शकते.
(सत्यार्थ प्रकाश,चतुर्थ समुल्लास)
#वेदांमध्ये_वेश्या_व्यवसाय
वेदांमध्ये वेश्या व्यवसायचा उल्लेख जागोजागी सापडतो.
त्यात वेश्यांसाठी भिन्न भिन्न शब्द आलेले आहे. जसे...
अतित्वरी(यजुर्वेद 30/15), अतिकद्वरी(यजुर्वेद 30/15)
अपष्कद्वरी(तैतिरीय ब्राह्मण 3-4-11-1)
द वर्ल्ड आफ कास्टिजंस चे लेखक मोतिचंद्र यांचे मत आहे कि वैदिक आर्य भाऊ नसलेल्या मुलींना जबरदस्ती वेश्या बनवत असे. (पृष्ठ 10)
#यजुर्वेद_महिधर_भाष्य
यजुर्वेद अध्याय 23 वरील महिधर भाष्य नुसार अश्वमेध यज्ञाच्या वेळी राणीला मृत घोड्याबरोबर सेक्स करावा लागत असे.
हे मुख्य पत्नी तुम दोनो टांगो को फैलाओ.
यजमान कि मुख्य पत्नी घोडे के लिंग को खिंचकर अपनी योनी मे स्थापित करती है,और कहती है हे विर्य सिंचने वाला घोडा मुझमें विर्य स्थापित करे.
(यजुर्वेद 23/20 महिधर भाष्य)
मृत घोड्याबरोबर सेक्स करायला सांगुन अश्लिल मंत्र म्हणायला सांगणे याच्यापेक्षा मोठा अपमान काय असु शकतो स्त्रीयांचा ?
कदाचित या प्रथेमुळेच घोडा लावणे या शिवीला सुरवात झाली असावी.
///////////////////////////////////
वेद स्त्री विरोधी आहे हे सिद्ध करणार एक वेगळ पुस्तक लिहलं जाऊ शकत परंतु वेदांमध्ये स्त्रीयांची स्थिती दाखवण्यासाठी वरील मंत्र पुरेसे आहे.
अंतः हे सिद्ध आहे कि वैदिक सभ्यते मध्ये स्त्रीयांना दुय्यम स्थान आहे.
अशा कालबाह्य ग्रंथामधुन ज्ञान विज्ञान तत्वज्ञान दाखवण्याचा प्रयत्न करणे म्हणजे भोळ्या मंदबुध्दी कट्टर हिंदुच्या मनात जाती धर्माचा अहंकार निर्माण करण्याच एक षडयंत्र आहे.
त्यामुळे या ग्रंथांचा भांडा फोड करने महत्वाचे आहे
_____
रावणाने सिताच्या स्तनाच वर्णन केल्याची पोस्ट केल्यावर हिंदुत्ववादी स्पष्टीकरण दिलं कि तो राक्षस होता म्हणुन अस वर्णन केलं.
पण रामायणात सिताच्या स्तनाचे वर्णन फक्त रावणानेच नाही तर हनुमान आणी रामाने पण केलं आहे.
सिता हरणानंतर राम शोक करतांना म्हणतात
मेरी प्रिया के दोनो गोल गोल #स्तन जो सदा लाल चंदनसे चर्चित होने योग्य थे,निश्चित हि रक्तकी किचमें सन गये होंगे.
(आरण्यकांड 63/8)
हनुमान लंकेत सिताला बघुन वर्णन करतो
देवी सिताका मुख पुर्ण चंद्रमाके समान मनोहर था,भौंहे सुंदर थी,दोनो #स्तन मनोहर और गोलाकार थे.
(सुंदर कांड 15/28)
////////////////////////////
रावणाने राक्षस असल्यामुळे स्तनाच वर्णन केलं तर हनुमान आणी राम कोण होते ?
मला वाटत ग्रंथ लेखकाने वेगवेगळ्या पात्रांच्या नावाने सिताला माध्यम बनवुन स्वतःची कामवासना पुर्ण करुन घेतली आहे.
_____
क्षत्रिय ब्राह्मणांचे द्वारपाल 👉 भागवत पुराण
ब्राह्मणो ने क्षत्रियो को अपना द्वारपाल बनाया है उन्हे द्वार पर रह कर रक्षा करनी चाहिए.घर मे घुसकर स्वामी के बर्तन मे खाने का उसे अधिकार नही.
(भागवत पुराण 1-18-34)
/////////////////////////////////////
मी काही बोलणार नाही जे ग्रंथात आहे ते दाखवलय फक्त
_____
रावण जेव्हा साधुच रुप घेऊन सिता हरण करण्यासाठी जातो तेव्हा तो तिच्या शरीराच वर्णन करतांना म्हणतो 👇
तुझे दोन्ही स्तन पुष्ट,गोलाकार,परस्पर भिडलेले,प्रगल्भ(परिपक्व),मोठे आणी समान आकाराचे सुंदर आहे.
(19-20)
तुझी कंबर एवढी एवढी पातळ आहे कि माझ्या मुठ्ठी मध्ये बसेल(22)
(पहा 👉 वाल्मिकी रामायण, अरण्यकांड 46/19,20,22)
//////////////////////////////////
योनी आणी स्तनाच वर्णन केल्याशिवाय यांचा एक ग्रंथ पुर्ण होत नाही.
मला वाटत कट्टर हिंदुनी बौद्ध मुसलमानांचा द्वेष करण्याऐवजी या गोष्टीकडे लक्ष देऊन याची समिक्षा केली पाहिजे.
_____
#मनुस्मृति_मध्ये_समलिंगी_संबंधाचा_उल्लेख
कट्टर हिंदुचा गैरसमज आहे कि समलिंगी संबंध पश्मिमी लोकांमुळे आले आहे आणी समलिंगी संबंधामुळे भारतीय संस्कृती धोक्यात येईल.
अशा कट्टर हिंदुनी आधी आपले ग्रंथ तपासुन पहायला हवे.
वैदिक हिंदुमधर्मामध्ये प्राचिन काळापासून समलिंगी संबंध होते याचे पुरावे आपल्याला मनुस्मृति मध्ये मिळतात.
मैथुनं पुंसि जातिभ्रशकरं स्मृतम्
अर्थात : पुरुष के साथ #मैथुन जातीभ्रष्ट करणे वाला पाप है.
(मनुस्मृति : 11/67)
================
बहुतेक पुरुषांमध्ये समलिंगी संबंधाच प्रमाण खुप कमी होत म्हणुन मनुने दंडाच विधान केलेल दिसत नाही पण स्त्रियांच्या बाबतीत मनुचा कायदा वेगळा आहे.
यदि स्त्री कन्याकी #योनीमे उंगली डाले तो राजा तात्काल उसके सिर के बाल मुंडवा दे या उसकी दो उंगलीया कटवा डाले या गधेपर चढकर असे सडको पर घुमाये
(मनुस्मृति : अध्याय 8, श्लोक 370)
////////////////////////////////
नक्कीच प्राचिन काळी वैदिक स्त्रीयांमध्ये समलिंगी संबंध मोठ्या प्रमाणावर होते त्यामुळे एवढा कठोर दंडाच विधान आहे.
वैदिक हिंदु ग्रंथावरुनच हे सिद्ध आहे कि वैदिक-हिंदु धर्मामध्ये प्राचिन काळापासून समलिंगी संबंध होते.
_____
#राम_सेतुचा_भांडा_फोड......
रामायणाला ऐतिहासिक सिद्ध करण्यासाठी कट्टर हिंदुचा पहिला पुरावा असतो तो म्हणजे राम सेतु. कट्टर हिंदुच म्हणने आहे कि हा सेतु रामाने लंकेत जाण्यासाठी बांधला होता....
परंतु हे नक्की खरं आहे का ?
मुळात राम सेतु हा शब्दच कुठल्या ग्रंथात सापडत नाही.
वाल्मिकी रामायणात ज्या सेतुचा उल्लेख आला आहे त्याच नाव राम सेतु नसुन नलसेतु आहे कारण तो रामाच्या सांगण्यावरुन नल नावाच्या वानराने आणी इतर वानरांनी बांधला.
संगमं च समुद्रस्य नलसेतोश्च बंधनम
अर्थात : राम वहा पहुंचकर समुद्र के संगम का दर्शन करते है और नलसेतु बनवाते है.
(वाल्मिकी रामायण : 1/3/34)
रामायणातुनच हे सिद्ध आहे कि ज्याला कट्टर हिंदु रामसेतु म्हणत आहे तो एक नल सेतु आहे.
आता नलसेतुच वर्णन पहा रामायणात.
दश्योजनविस्तिर्ण शतयोजनमायतम् दद्टशुदर्देवरांधर्वाः नलसेतुं सुदुष्करम्
अर्थात : वानरो ने पहले दिन 14 योजना,दुसरे दिन 20 योजना,तिसरे दिन 21 योजना,चौथे दिन 22 योजना,पाचवे दिन 23 योजना लंबा पुलं बांधा.इस तरह नल ने 100 योजना अर्थात 1288 किलोमीटर लंबा पुलं तयार किया.
पुलं 10 योजना अर्थात 128 किलोमीटर चौडा था.
इस नल द्वारा निर्मीत नलसेतु को देखने देवता और गंधर्व आहे.
(वाल्मिकी रामायण : 6/22/76)
(संस्कृत मधिल 1 योजना म्हणजे 8-9 मैल होय.)
रामायणात ज्या सेतुची चर्चा केली आहे तो सेतु 1288 किलोमीटर लांब आणी 128 किलोमीटर रुंद आहे.
आता याउलट वास्तविक सेतुची लांबी हि फक्त 30 किलोमीटर लांब आहे आणी 10 फुट रुंद आहे.
30 किलोमीटर आणी रामायणातील 1288 किलोमीटर लांबीचा सेतु मध्ये जमिन आसमानचा फरक आहे.
उरलेला 1258 किलोमीटर लांबीचा सेतु कुठे गायब झाला याच उत्तर कट्टर हिंदुकडुन अपेक्षीत आहे.
वास्तविक सेतु आणी रामायणात वर्णन केलेल्या सेतुची तुलना केल्यावर आपल्या सहज लक्षात येईल कि दोन्ही सेतुंचा एकमेकांशी काहीही संबंध नाही.
/
/
पाण्यावर तरंगणारया दगडांच रहस्य काय आहे ....??
उज्जैन सायन्स काॅलेजचे माजी विभागाध्यक्ष डाॅ आर एन तिवारीच्या मते ज्वालामुखी नंतर लावा जमा झाल्यानंतर असे दगडं तयार होतात,त्यांची घनता कमी असल्यामुळे ते पाण्यावर तरंगु शकतात.
या दगडांना प्युमिस स्टोन म्हणल जातं.
अंततः हे ही सिद्ध आहे कि राम नावाचा तरंगणारया दगडांशी काहीही संबंध नाही.
====================
वरील काही मुद्यांमध्ये आपण कट्टर हिंदुच्या भ्रामक प्रचाराचा भांडा फोड केला आहे.
पण कट्टर हिंदु एक गोष्ट खरी सांगतात प्राचीन भारताच विज्ञान खुप विकसीत होतं.
1288 किलोमीटर आणी 128 किलोमीटर रुंदीचा पुलं फक्त 5 दिवसात ते पण फक्त माकडांच्या सहाय्याने 😨😨😨
______
हमारा समाज पुस्तकाचे लेखक बि.ए. संतराम voyage of varthema vol 1. Page 14 चा संदर्भ देऊन एका अश्लिल प्रथेचा उल्लेख करतात.
वारथेमा मध्य भारतात आलेला एका पर्यटक होता.
तो लिहितो 👇👇
जब राजा विवाह करता है तो वह ब्राह्मणोमें से योग्यतम और प्रतिष्ठित मनुष्य को चुनता है और उसे पहली रात अपनी #स्त्री के साथ #सुलाता है. ताकी वह उसके साथ #समागम(सेक्स) करे. यह समझिये कि ब्राह्मण ये काम प्रसन्नतापुर्वक करता है.
राजा को उसे चार पाचसौ डोकट देणे पडते है.
(हमारा समाज, पृष्ठ 186)
काही लोकं म्हणतील कि याचा धर्माशी संबंध नाही परंतु अनुभवी सुरेंद्र अज्ञात यांना हि चालाखी माहिती आहे, ते या प्रथेच मुळ धर्ग्रंथात दाखवतात.
#अथर्ववेदात आहे कि 👇
#स्त्री को #ब्राह्मण से भिन्न पहले दस #पति हो परंतु जब ब्राह्मण उसका पाणी ग्रहण करे तो वही एक उसका पति होता है.
उस का ब्राह्मण पति हि असली पति है.
(अथर्ववेद: 5/17/8-9)
यावर टिपण्णी करतांना ते म्हणतात 👇
इस तरह के मंत्रो के आधार पर #सतिप्रथा तो कभी बंद नही हुई हा नंबुदरी ब्राह्मणो ने इस के आधार पर मालाबार,कालिकट आदि मे उन्नितीरी तिमुरी आदि जातीओ के #नारीओ के साथ सुहागरात मनाने व उनके साथ विवाहित पतिओ से पहले #संभोग करने का अधिकार प्राप्त करके धार्मिक #व्यभिचार व धार्मिक #वेश्यावृत्ती को अवश्य शुरु किया.
(क्या बालु कि भित पर खडा है हिंदु धर्म, पृष्ठ 646)
/////////////////////////////////////////////////
इतिहासाच्या आधारे हिंदु मुस्लिम द्वेष निर्माण करणारे हिंदुत्वाचे ठेकेदार हा सामाजिक कुप्रथांचा इतिहास भोळ्या मंदबुध्दी कट्टर हिंदुना सांगत नाही.
भोळ्या मंदबुध्दी कट्टर हिंदुनी यावर विचार करावा कि त्यांचा इतिहास गौरवशाली आहे कि लाजिरवाणा.
______
#गोरा_पुत्र_मिळवण्याचे_उपाय
मी अनेक आर्य समाजी आणी कट्टर हिंदुना अस म्हणतांना ऐकलं आहे कि वैदिक काळातील विज्ञान आधुनिक विज्ञानापेक्षा जास्त विकसीत होत.
आधी मी त्यांच्या दाव्यावर विश्वास ठेवत नव्हतो पण बृहदारण्यकोपनिषद वाचल्यावर वैदिक विज्ञानाची महानता माझ्या लक्षात आली.
बृहदारण्यकोपनिषद लेखकाने गोरा पुत्र मिळवण्याचा एक विज्ञानवादी उपाय सांगीतला आहे.
लेखक म्हणतो.....
जो पुरुष चाहता हो कि मेरा पुत्र #शुक्ल_वर्णका हो,एक वेद का अध्ययन करे,और पुरे सौ वर्षोकी आयुतक जिवित रहे,उस दशा मे वे दोनो पति-पत्नि #दुध और #चावल को पका कर खिर बना ले.
और उसमे #घी मिलाकर खाये.
इससे वे उपयुक्त योग्यता वाले पुत्र को उत्पन्न करने मे समर्थ होते है.
(बृहदारण्यकोपनिषद 6-4-14,शंकरभाष्य,गिताप्रेस पृष्ठ 1351)
////////////////////////////////////
युरोप खंडातील मुल गोरे का बर होतात?
आई वडीलांनी दुध,भाताची खिर बनवुन तुप टाकुन खाल्ल्याने?
ऐका वैदिक शास्त्रज्ञांनो त्तचेचा रंग पिगमेंट(रंगद्रव्य) वर अवलंबून आहे ज्याला मेलानिन म्हणतात.
मेलानिन कमी जास्त असणे अतिनिल किरण (ultraviolet rays) वर अवलंबून आहे.
जेवढ जास्त तापमान असणार तेवढ शरीरामध्ये मेलानिन तयार होणार.
कमी तापमान असणारया प्रदेशातील लोकांच्या शरीरात कमी मेलानिन असतं म्हणजेच गोरा रंग.
जास्त तापमान असणारया प्रदेशातील लोकांच्या शरीरात जास्त मेलानिन असतं म्हणजेच सावळ्या रंगाची लोक.
हे सांगत आधुनिक विज्ञान.
तुमच दहि-भाताच्या खिरमध्ये तुप खाऊन गोरा पुत्र मिळवण्याच वैदिक विज्ञान अफ्रिका खंडातील लोकांना सांगा.
त्यांचा याची जास्त गरज आहे.
_____
#ब्राह्मण_पाहूण्याबरोबर_सेक्स 👉 महाभारत
इंग्रजांमुळे हिंदु संस्कृती बिघडली असा हास्यास्पद दावा कट्टर हिंदुचा असतो.
कधी कधी ते Bollywood ला ही दोष देतात.
परंतु खरच हिंदु धर्म इतका महान आहे का ?
महाभारत,अनुशासनपर्व 2 मध्ये एक कथा आहे.
दुरदर्शन नावाचा एक गृहस्थ असतो.त्याच्या पत्नीचे नाव ओघवती असते.
श्लोक 41 नुसार त्याला गृहस्थ धर्माच पालन करुन मृत्यू वर विजय मिळवायचा असतो.
तो त्याच्या पत्नीला सांगतो.....
जिस-जिस वस्तु से अतिथी संतुष्ट हो वह वस्तु तुम्हे सदा हि उसे देनी चाहिए.
यदि अतिथी के संतोष के लिए तुम्हे अपना शरीर भी देना पडे तो मनमे कभी अन्यथा विचार न करना (श्लोक 43)
एके दिवशी सुदर्शन च्या अनुपस्थितीत एक तेजस्वी ब्राह्मण त्याच्या घरी आला, सुदर्शनची पत्नी ओघवतीने वेदोक्त विधीने त्याची पुजा केली.
नंतर ओघवती ने ब्राह्मणाला विचारल आपल्याला कोणत्या वस्तुची आवश्यकता आहे ?
ब्राह्मण म्हणतो....
यदि तुम्हे गृहस्थ धर्म मान्य है तो मुझे अपना शरीर देकर मेरा प्रिय कार्य करना चाहिए (श्लोक 54)
ओघवती शरीर देण्यासाठी तयार होते.
ब्राह्मण आणि ओघवती दोघेही घरात जातात.
थोड्या वेळाने सुदर्शन तेथे येतो.
आपल्या पत्नीने गृहस्थ धर्माच्या पालनासाठी ब्राह्मण पाहुण्याची इच्छा पुर्ण केली हे पाहून त्याला आनंद होतो.
गृहस्थ धर्माच्या पालनामुळे सुदर्शन ची किर्ती तिनही लोकात पसरते आणी तो मृत्यू वर विजय मिळवतो.
(महाभारत, अनुशासनपर्व,अध्याय 2)
//////////////////////////////////////
हिच का महान संस्कृती?
नवरा घरी नसतांना अनोळखी पुरुषाबरोबर सेक्स करने......
महाभारताचा संदर्भ न देता जर हि कथा लिहिली असती तर पोलीस टाईम्स मधिल बातमी आहे कि काय असा गैरसमज वाचणारयांच्या मनात निर्माण झाला असता.
_____
#संडास_करण्याचे_मनुस्मृति_मधिल_विचित्र_नियम
मनुबाबा ने संडास करताना काही विशिष्ट नियमांच पालन करण्याचा फतवा जारी केला आहे.
👇
तिरस्कृत्योच्चरेत्काष्ठलोष्ठपत्रतृणादिना...
नियम्य प्रयतो वाचं संवीतांगोsवगुंठित....
मुत्रोच्चारसमुत्सर्गं दिवा कुर्यादुदड्मुख....
दक्षिणाभिमुखो रात्रौ संध्यायोश्च तथा दिवा..
छायायामन्धकारे वा रात्रावहनि वा द्विज द्विज....
यथासुखमुखः कुर्यात्प्राणबाधाभयेषु च..
प्रत्यग्निं प्रतिसूर्यं च प्रतिसोमोदकद्विजान्...
प्रतिगां प्रतिवाचं प प्रज्ञा नश्यति मेहत.....
अर्थातः लकडी,मिट्टी,पत्ता,घास आदि से भूमी को ढक कर तथा चुप हो कर,सिर पर कपडा डाल कर (घुंघट सा निकाल कर) मलमुत्र त्याग करे.दिन मे तथा दोनो(प्रातःकाल और सायंकाल कि) संध्याओं मे उत्तर कि ओर मुंह कर के तथा रात्रि में दक्षिण की ओर मुंह कर के मलमुत्र त्याग करे.द्विज रात मे या दिन मे बादलों की छाया हो जाने पर अथवा कुहरे आदि से अंधेरा हो जाने पर और प्राणबाधा का भय होने पर जिस ओर चाहे मुंह कर के मलमुत्र त्याग कर सकता है. सर्य के सामने,चंद्रमा,जल,ब्राह्मण,गाय और हवा की ओर मुंह कर के मलमुत्र त्याग करने वाले कि बुद्धि नष्ट हो जाती है.
(मनुस्मृति: अध्याय 4,श्लोक 49 ते 52)
//////////////////////
कपडा डोक्यावर घेऊन संडास करण्यामागच काय वैज्ञानिक कारण आहे ?
सकाळी आणी संध्याकाळी उत्तर दिशेला तोंड करुन संडास करावी आणी रात्री दक्षिण दिशेला तोंड करुन संडास करावी, का
पुर्वेला किंवा पश्चिमेला तोंड केल्यावर संडास होणार नाही का ?
रात्री अंधार जास्त असल्यावर द्विज म्हणजे ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य कुठल्याही बाजुला तोंड करुन संडास करु शकतात...
बर.. शुद्र का नाही ?
सुर्य,चंद्र,पाणी,ब्राह्मण,गाय,हवा यांच्याकडे तोंड करुन संडास केल्यावर बुद्धी नष्ट होते...
बर ठिक आहे पण जर एखाद्याला जर जुलाब होत असतील तर समोर सुर्य,चंद्र,पाणी,ब्राह्मण,गाय आहे का नाही हा विचार करु पर्यंत चड्डीतच जुलाब होण्याची शक्यता आहे.
मंग मनुस्मृति समर्थक कधी पासुन हे नियम पाळायला सुरवात करताय.
______
#हिंदु_सांप्रदायाचे_नियम_देशाच्या_एकतेला_घातक
आपल्या देशात उत्तर भारत आणि दक्षिण भारत असा भेदभाव आहे,कश्मिरची समस्या आहे,अनेक वेळा तिरंग्याचा अपमान केला जातो,ठराविक प्रदेशातील लोकांना विदेशी म्हणलं जात,कोणी म्हणत युपी बिहारच्या लोकांनी महाराष्ट्रात यायच नाही,कोणी म्हणत बंगाल म्हणत बंगाल मध्ये रहायच असेल तर बंगाली भाषा आलीच पाहिजे.
या मानसिकतेच कारण आहे पुर्ण देशाला एक देश न समजणे.
या मानसिकतेच मुळ आपल्याला हिंदु ग्रंथात सापडत.
#आर्य_अनार्य_प्रादेशिक_भेद
कीकट वह देश है जहा अनार्यो का निवास है (निरुक्त 6/32)
आर्य समाजी पंडित राजाराम शास्त्रीच्या मते कीकट बिहारमध्ये रहाणारी अनार्य जात होती.
#बौधायन_धर्मसुत्र
या ग्रंथात ठराविक प्रदेशांना अनार्यांचा प्रदेश म्हणल आहे.
या ग्रंथात आहे कि 👇👇
अवंति(धौलपुर पश्चिम भाग),मगध(दक्षिण बिहार), सुराष्ट्र(काठियावाड), दक्षिणी-पथ(दक्षिण भारत) हे शुद्ध आर्य नाही.
(बौधायन धर्मसुत्र 1/1/31)
#ठराविक_प्रदेशात_गेल्याने_अपवित्र_होणे
याच ग्रंथात पुढे आहे कि 👇
आरट्टक देश (पंजाब उत्तर-पुर्व),कारस्कर,पुंड्र,सौविर,अंग,बंग,कलिंग मध्ये जातो तो अपवित्र होतो.
सर्वपृष्ठ नावाचा यज्ञ केल्यावर तो शुद्ध होतो.
(बौद्धायन धर्मसुत्र 1/1/15)
समिक्षा : आपल्याच देशातील ठराविक प्रदेशांना अनार्यांचा प्रदेश घोषीत करणे त्यांना अपवित्र घोषीत करणे देशाच्या एकता आणी अखंडतेला घातक नाही का?
#मनुस्मृति_मध्ये_असंख्य_देश
भोळे मंदबुध्दी कट्टर हिंदु म्हणत असतात कि भारत प्राचिन काळी हिंदु राष्ट्र होता.परंतु त्यांच हे मत स्वतःच्या ग्रंथाच्या विरोधात आहे.
सरस्वती आणी दृषद्वती या दोन देवनद्यांच्या मध्ये जो देवनिर्मित देश आहे त्याला ब्रह्मावर्त म्हणतात.
(मनुस्मृति 2/19)
ब्रह्मर्षी देश ब्रह्मावर्त देशापेक्षा कमी पवित्र आहे. (मनुस्मृति 2/20)
येथे आपल्याच देशातील दोन प्रदेशांची तुलना करुन एकाला कमी पवित्र दाखवल आहे.
पुढे श्लोक 21,22,23 मध्ये इतर तिन देशांचा उल्लेख आहे.
समिक्षा : वाह रे..! अखंड हिंदु राष्ट्राच स्वप्न बघणारे भोळे मंदबुध्दी कट्टर हिंदु.
तुमच्या ग्रंथात पर्वताच्या पलिकडच्या भागाला पण दुसरा देश म्हणलं आहे.
ठराविक प्रदेशांना अपवित्र घोषीत केलं आहे.
कसा बनवणार अखंड हिंदु राष्ट्र?
#ठराविक_प्रदेशात_जाण्याची_बंदी
देवल-स्मृती मध्ये आहे कि त्रिशंकु देशात जावु नये जो 12 योजन(108 मैल) पसरलेला आहे.
(देवल स्मृती 4)
याच ग्रंथात पुढे आहे कि 👇
सिंधु प्रदेश,कलिंग,कोकण,पुर्वी बंगाल मध्ये जो व्यक्ती जातो तो अपवित्र होतो.
(देवल स्मृती 16)
#महाभारतात_पंजाबची_निंदा
महाभारत कर्णपर्व मध्ये पंजाबची निंदा केली असुन तेथील लोकांना धर्महिन घोषीत केलं आहे.
कर्णपर्वात आहे कि आर्यांनी तेथे दोन दिवसही राहु नये.
(महाभारत,कर्णपर्व 44)
#वेगवेगळ्या_वर्णासाठी_देशाची_सिमा
धर्मसिंधु ग्रंथात प्रत्येक वर्णाच्या व्यक्तीसाठी देशाची सिमा वेगवेगळी आहे.
ब्राह्मण के लिए अपने निवासस्थान से 20 योजन,क्षत्रिय के लिए 24 योजन,वैश्य के लिए 30 योजन,शुद्र के लिए 60 योजन से दुर का इलाका देशांतर(दुसरा देश) है.
(धर्मसिंधु,तृतीय परिच्छेद)
क्या बालु कि भित पर खडा है हिंदु धर्म, पृष्ठ 121
//////////////////////////////////////
धर्मग्रंथातील अशा आदेशामुळेच आपल्या देशात राष्ट्रीय एकतेचा अभाव आहे.
ठराविक अंतरावरील प्रदेशाला विदेश घोषीत केलं आहे,मनुस्मृति मध्ये पर्वताच्या पलिकडच्या भागाला विदेश घोषीत केलं आहे,आर्यांना अनार्य प्रदेशात न जाण्याचा आदेश आहे,अनार्य प्रदेशाला अपवित्र घोषीत केलं आहे,आर्यांच्या प्रदेशाला पवित्र घोषीत केलं आहे.
शेकडो वर्षे ग्रंथातील या नियमांच पालन केल्यामुळे भारतीय लोकांमध्ये राष्ट्रीय एकतेचा अभाव असणे सहाजिक आहे.
अंतः हे सिद्ध आहे कि हिंदु सांप्रदायाचे नियम देशाच्या एकतेला घातक आहे.
_____
#रामाच_वास्तविक_चरित्र 👉 वाल्मिकी रामायण
राम भोळ्या मंदबुध्दी कट्टर हिंदुच्या आस्थेच प्रतीक आहे.
राम आदर्श पुत्र,आदर्श भाऊ,आदर्श पति होते अशी हिंदु समाजत मान्यता आहे.
रामाच्या या आदर्श चरित्रामुळे राम-मंदिर हा हिंदुत्ववाद्यांचा प्रमुख मुद्दा आहे.
परंतु रामाच चरित्र खरच एवढं आदर्श होतं का याची चिकित्सा करुन भोळ्या मंदबुध्दी कट्टर हिंदुना आरसा दाखवणे महत्वाचं आहे
#बाबासाहेब_आंबेडकरांच_मत
रामाबद्दल बाबासाहेब म्हणतात कि रामाला मद्दपान वर्ज्य नव्हते.राम भरपुर मद्द पित असे आणी वाल्मिकीच्या म्हणन्यानुसार या मद्दमैफलीत आपल्यासमावेत सीतेलाही सहभागी करुन घेण्यावर रामाचा कटाक्ष असे.
वाल्मिकीने रामाच्या जनान्याचे जे वर्णन करुन ठेवले आहे ते पाहता तेथे नृत्य-गाण कलेत निपुण असणारया अप्सरा,उरगा आणी किन्नरी होत्या.
यासुंदरीच्या घोळक्यात मध्ये बसुन रामाचे मद्दपान आणी नाचगन चालत असे त्या रामाला खुष करीत असे आणी राम त्यांना हार घालत असे.
(राम आणि कृष्णाचे गौडबंगाल,पृष्ठ 14)
रामाच्या अशा वागण्याचा आर्य समाजी आणी कट्टर हिंदु कोणता आदर्श घेणार आहे.
#जन्माची_कथा_विज्ञान_विरोधी
राम जन्माच्या कथेबद्दल मी काही महिन्यांपूर्वी एक सविस्तर लेख लिहीला आहे येथे संक्षिप्त मध्ये एवढच सांगेल कि दशरथ राजा पुत्र-उत्पन्न करण्यात असमर्थ असल्यामुळे ऋशश्रृंग ऋषी त्याच्यासाठी पुत्रेष्टि यज्ञाच आयोजन करतो.
यज्ञातुन एक पुरुष बाहेर येतो आणि राजाला खीर देतो.
ती दशरथच्या तिनही राण्यांनी पिल्यावर त्या गर्भवती होतात.
(श्लोक 31)
(पहा संपुर्ण कथा बालकांड सर्ग 16)
हि कथा विज्ञानविरोधी आहे हे शाळेत शिकणारा मुलगाही सांगेल.
या कथेतुनच सिद्ध होत कि राम एक काल्पनिक पात्र आहे.
कारण खिर पिऊन स्त्री गर्भवती फक्त काल्पनिक कथेतच होऊ शकते.
#ताडका_वध
यज्ञाचा विरोध केल्याच्या आरोपावरुन राम आपला गुरु विश्वमित्राच्या सांगण्यावरुन ताडकाची हत्या करतो.
विश्वमित्र म्हणतो....
हे रघुनंदन(राम) तुम गौओं और ब्राह्मणो का हित करने के लिए इस दुष्ट पराक्रमवाली भयंकर और दुश्चरित्र यक्षी कि हत्या कर डालो. (श्लोक 15)
(पहा संपुर्ण कथा बालकांड सर्ग 25)
केवळ यज्ञाचा विरोध केल्यामुळे एका स्त्रीची हत्या करन्याच कृत्य रामाच्या आदर्श चरित्रावर प्रश्न उपस्थिती करणार आहे.
ताडका एक शेतकरी स्त्री पण असु शकते कारण इतिहासकारांनुसार यज्ञात पशुबळीचा विरोध सर्वांत आधी शेतकर्यांनीच केला.
#बालीला_लपुन_मारने
किष्किंधाकांड मधील कथेनुसार बाली आणी सुग्रीवच युद्ध चालु असतांना राम झाडामागे लपुन बालीला बाण मारतो.
जखमी होऊन पडलेला बाली रामाला म्हणतो
मै तो दुसरे के साथ युद्ध मे उलझा हुआ था.उस दशा मे आपने मेरा वध करके यहा कौनसा गुण प्राप्त किया है. (श्लोक 16)
(पहा संपुर्ण कथा किष्किंधाकांड सर्ग 17)
युद्धनियमांच उल्लंघन करुन शत्रुला लपुन मारने यातुन कोणता आदर्श घ्यायचा रामाचा ?
#शुद्र_शंबूक_वध
उत्तरकांड मधील एका कथेनुसार
एका ब्राह्मणाच्या मुलाचा अकाळी मृत्यू होतो.
ब्राह्मण रामाला म्हणतो कि तुमच्या राज्यात एक शुद्र तपस्या करत आहे त्यामुळे माझ्या मुलाचा मृत्यू झाला आहे.
यावर राम त्या तपस्या करणारया शुद्राचा शोध घेतो त्याला वर्ण विचारल्यावर तपस्या करणारा स्वतःला शुद्र सांगतो.
तेवढ्यात रामाने तलवार काढली आणी त्या शुद्राचे मुंडक उडवले.
रामचंद्रजीने म्यानसे तलवार निकाली और उस से उस का सिर काट डाला (श्लोक 4)
(पहा संपुर्ण कथा उत्तरकांड सर्ग 76)
#अनार्य_असल्यामुळे_शुर्पणखा_वर_अत्याचार
अरण्यकांडातील कथेनुसार राम,लक्ष्मण,सिता वनवासात असतांना शुर्पणखा तेथे येते.
तिची चेष्टा करण्यासाठी राम लक्ष्मण दोघेही तीला स्वतःच्या विवाहित जिवनाबद्दल खोटी माहिती देतात परंतु जेव्हा ती भ्रमित होऊन सितावर हल्ला करते तेव्हा राम म्हणतो....
इन अनार्यों का मजाक नही करना चाहिए (श्लोक 19)
इसको किसी अंग से हिण कर देना चाहिए(श्लोक 20)
महाबली लक्ष्मण ने राम के देखतेदेखते म्यान से तलवार निकाली और शुर्पणखा के नाककान काट लिए (श्लोक 21)
(पहा संपुर्ण कथा अरण्यकांड सर्ग 18)
#सितेचा_अपमान
रावण वधानंतर जेव्हा राम आणि सिताची भेट होते तेव्हा राम सितेला म्हणतो.....
तुम्हारे चरित्रमे संदेहका अवसर उपस्थित है फिर भी तुम मेरे सामने खडी हो (श्लोक 17)
रावण तुम्हे अपनी गोद मे उठा कर ले गया,वह तुम पर अपनी दुषित दृष्टी डाल चुका है.
ऐसी अवस्था मे अपने कुल को महान मानने वाला मै तुम्हे कैसे ग्रहण कर सकता हु.
(श्लोक 20)
(पहा संपुर्ण कथा युद्धकांड,115)
रामाच्या अशा वर्तनामुळे सितेला अग्निपरिक्षा द्यावी लागली तेव्हा रामाने तिचा स्विकार केला.
नंतर परत गर्भवती अवस्थेत जंगलात सोडलं.
#रामाने_केली_आत्महत्या
नंतर उत्तरकांड 97 नुसार लव आणी कुश 12 वर्षाचे झाल्या नंतर राम वाल्मिकीची परवानगी घेऊन सितेला स्वतःची शुद्धता सिद्ध करण्यासाठी बोलवतो.
सिता येते आणि शपथ घेते...
मै राम के सिवा दुसरे किसी पुरुष का मन से भी चिंतन नहीं करती यदि यह सत्य है तो भगवती पृथ्वी मुझे अपनी गोद मे स्थान दे.
(श्लोक 14)
सिताके शपथ लेते हि भुतलसे अद्भुत सिंघासन प्रकट हुआ (17)
श्लोक 20 नुसार सिता त्या सिंघासनावर बसुन पाताळात गेली.
उत्तरकांड 106 नुसार रामाकडे आलेल्या एका पाहुण्याची अट लक्ष्मणामुळे खंडित झाल्यामुळे राम लक्ष्मणाचा त्याग करतो
दुःखी होऊन लक्ष्मण सरयु नदीच्या किनारी जाऊन श्वास रोखुन आत्महत्या करतो.
लव आणी कुशचा राज्यभिषेक झाल्यानंतर रामही सरयु नदिमध्ये प्रवेश करतो.
वाल्मिकी नुसार...
राम सरयु के जल मे प्रवेश कर गए वे आगे हि आगे बढते गए और वैष्णव तेज में जा मिले.
आधी सिता पाताळात गेली,नंतर लक्ष्मणाने मोठ्या भावाने केलेल्या त्यागाच्या दुःखाने श्वास रोखुन आत्महत्या केली.
यामुळे मानसिक तणावात येऊन रामानेही सरयु नदित बुडुन आत्महत्या केली.
यापेक्षा तर एखादा हिंदी पिक्चर बरा त्यात शेवट तरी सुखी दाखवतात.
=================
जन्म अवैज्ञानिक पद्धतीने,यज्ञाचा विरोध केल्यामुळे ताडकाची हत्या,ब्राह्मणाचा मुलगा जिवंत करण्यासाठी शुद्र शंबुकाची हत्या,अनार्य असल्यामुळे शुर्पणखा वर अत्याचार,सितेच्या चरित्रावर संशय,दरबारात स्त्रीयांना नाचवणे दारु पिणे यातुन कोणता आदर्श कट्टर हिंदु आणी आर्य समाजी घेणार आहे ?
वाल्मिकी रामायण तपासुन बघीतल्यावर रामाला देव नाही तर एक संस्कारी सज्जन पुरुष पण आपण म्हणु शकत नाही.
राम भक्तांनी जर निष्पक्ष भुमिका घेऊन रामायण वाचले आणी रामाचे चरित्र जाणुन घेतले तर त्यांचा उपयोग राजकारणी लोकं मंदिराचा मुद्दा उपस्थित करुन देशात सांप्रदायीक तणाव निर्माण करु शकणार नाही.
//////////////////////////////////
सहायक ग्रंथ
1. वाल्मिकी रामायण,गिताप्रेस गोरखपूर
2.राम आणि कृष्णाचे गौडबंगाल,बाबासाहेब आंबेडकर,सुगावा प्रकाशन,पुणे.
3.रामायण या सितायन,सुरेंद्र कुमार अज्ञात,सम्यक प्रकाशन,दिल्ली.
_____
#हनुमानाच्या_जन्माच्या_विचित्र_आणी_विज्ञान_विरोधी_कथा.
निवेदन : आमचा उद्देश हनुमान भक्तांच्या धार्मिक भावना दुखावण्याचा नसुन धर्मग्रंथात विज्ञान असल्याचा दावा करुन भोळ्या मंदबुध्दी लोकांचा brain wash करणारया धुर्त लोकांना प्रत्युत्तर देणे हा आमचा उद्देश आहे.
#रामायणातील_कथा
रामायणात हनुमानाच्या जन्माबद्दल आहे कि
अंजना एका पर्वतावर गेली असता तेथे अंजनाच सौंदर्य पाहुन पवनदेव
काम-मोहित झाले.
उन्होंने उस सुंदरीको अपनी दोनो विशाल भुजाओसे भरकर अपने ह्रदयसे लगा लिया (श्लोक 15)
अंजनाने पवनदेवाच्या या वागण्याचा विरोध केल्यावर पवनदेव म्हणतात
मै तुम्हारे एकपत्नी व्रतका नाश नही कर रहा हु.
मैने तुम्हारे साथ मानसिक समागम किया है इससे तुम्हे बल पराक्रम से संपन्न बुद्धीमान पुत्र होगा (श्लोक 17/18)
अंतः पवनदेव आणि अंजना यांच्यात झालेल्या मानसिक समागमातुन हनुमानाचा जन्म होतो.
(वाल्मिकी रामायण,किष्किंधाकांड 66)
#शिवपुराण
यात हनुमानाच्या जन्माबद्दल आहे कि 👇
जेव्हा विष्णुच मोहिनी रुप पाहुन शंकराच विर्य स्खलित झालं तेव्हा ते विर्य सप्तॠषींनी एका पात्रात ठेवले.
ते शंकराच विर्य अंजनाच्या कानात टाकल्याने अंजना गर्भवती झाली आणी त्यातुन हनुमानाचा जन्म झाला.
(शिवपुराण,शतरुद्रसंहिता,अध्याय 10)
#स्कंदपुराण
यात हनुमानाच्या जन्माबद्दल आहे कि 👇
अंजना आणी केशरीला विवाहाच्या अनेक वर्षानंतरही पुत्र होत नव्हता.
तेव्हा मंतग ऋषीच्या सांगण्यावरुन अंजनाने वायुदेवाची तपस्या केली.
अंजनाच्या तपस्येने प्रसन्न होऊन वायुदेव अंजना जवळच राहु लागले,त्यांच्या आशीर्वादाने अंजनाने हनुमानाला जन्म दिला.
(स्कंदपुराणा, वैष्णव-भुमिवाराहखंड, अध्याय 73)
///////////////////////////////////////////////////////////
मानसिक समागमातुन पुत्र प्राप्ती होणे,आशिर्वादाने पुत्र प्राप्ती होणे,विर्य कानात टाकल्याने पुत्र प्राप्ती होणे हे सर्व विज्ञान विरोधी आहे.
स्कंद पुराणातील कथेनुसार अंजना आणी वायुदेव जवळ राहु लागल्याने अंजना हनुमानाला जन्म देते.
यावरुन तर हेच सिद्ध होतं कि दोघांमध्ये अनैतिक संबंध झाले होते.
संघी मनुवादी लोकांनी हनुमानाच्या जन्माबद्दल या कथा वाचल्या नसणार.
वाचणार तरी कस काय त्यांना बौद्ध मुसलमानांचा द्वेष करण्यातुन वेळ मिळेल तेव्हा वाचतीन ना हे सगळं.
असो...
अंतः हे सिद्ध आहे कि हनुमानाच्या जन्माबद्दलच्या धर्मग्रंथातील कथा या विज्ञान विरोधी आहे.
त्यामुळे अशा कालबाह्य ग्रंथात ज्ञान विज्ञान तत्वज्ञान शोधणे हास्यास्पद आहे.
_____
शुद्राची तुलना कुत्र्याबरोबर 👉 आपस्तंभ स्मृती
स्मृती ग्रंथांपैकी एक असलेल्या आपस्तंभ स्मृती नुसार 👇
ब्राह्मणाने नेहमी शुद्राच्या गतिविधी कडे लक्ष ठेवावे तो काय करत आहे ते.
त्याला जमिनीवर अन्न टाकुन द्यावे. कारण जसा कुत्रा असतो तसाच शुद्र आहे.
अर्थात कुत्रा आणी शुद्र यात फरक नाही.
(आपस्तंभ स्मृती 9/34)
///////////////////////////////////////////
आता काही भोळे मंदबुध्दी लोक म्हणतील कि आम्ही कुठे मानतोय आता हे सगळे ग्रंथ.
पण मित्रांनो असच काही विवादित जर कुराण मध्ये सापडल असत तर संघी मनुवादी लोकांनी किती द्वेष पसरवला असता त्यांच्या बद्दल?
_____
क्षत्रिय ब्राह्मणो कि संताने 👉 महाभारत आदि पर्व
परशुराम ने 21 बार पृथ्वी को क्षत्रिय रहित किया था ये तो हम जानते हि है लेकिन फिर से क्षत्रिय कैसे पैदा हो गये इसका जवाब हमे महाभारत मे मिलता है.
आदिपर्व 64 मे है कि
परशुरामने 21 बार पृथ्वी को क्षत्रिय रहित करने के बाद महेंद्र पर्वत पर तपस्या कि (श्लोक 4)
क्षत्रिय स्त्रीयोने पुत्र प्राप्ती के लिए ब्राह्मणो की शरण ली (श्लोक 5)
उन सहस्त्रो क्षत्राणियोंने ब्राह्मणो से गर्भ धारण किया और क्षत्रियकुमारो को जन्म दिया.
इस प्रकार ब्राह्मणो द्वारा क्षत्राणियों के गर्भ से धर्मपुर्वक क्षत्रिय संतानोकि उत्पत्ती और वृद्धी हुई(श्लोक 7,8)
(देखे महाभारत आदिपर्व 64,गिताप्रेस गोरखपूर)
_____
काही संघी भिडेच्या वक्तव्याच समर्थन करुन बुद्धांच्या अहिंसेच्या शिकवणीवर आक्षेप करत आहे.
आक्षेपाला उत्तर देताना मी कुठल्या बौद्ध लेखकाच्या पुस्तकाचा संदर्भ देणार नाही.
20 व्या शतकातील एक हिंदु समाजसुधारक 'हमारा समाज' नावाच्या पुस्तकात बुद्ध धम्माबद्दल लिहीतात 👇
जब तक भारत मे बौद्ध धर्म का प्रचार रहा यह देश स्वतंत्र और सबल बना रहा.तब भी विदेशी आक्रमणकारीओ के लिए यह देश उसी प्रकार खुला पडा था जैसा आज है. परंतु यह इतना बलवान था कि किसी को भी इसकी ओर आख उठाकर देखने का साहस न होता था.
1200 वर्ष तक भारत स्वाधीन एवं अखंड बना रहा.
(हमारा समाज,बि.ए.संतराम,पृष्ठ 204)
______
संघीच्या गौमुत्र-गोबर वक्तव्यांच मुळ त्यांच्या ग्रंथात आहे.
पराशर स्मृतीने गौमुत्र-गोबर दुध,दही,तुपाबरोबर एकत्र करुन पिण्याचा सल्ला दिला आहे.
यात आहे कि 👇
गोमुत्र,गोबर,दुध,दही,घी और कुशा का जल इन सबके मिश्रण को पवित्र एव पापनाशक पंचगव्य कहा गया है.
(पराशर-स्मृती 11/29)
पुढे आहे कि 👇
किसी ब्राह्मण ने चांडाल का अन्न खा लिया तो वह #गोमुत्र मे पकाई गयी जव कि लपसी यवागु खाकर शुद्ध होता है.
(पराशर स्मृती 6/32)
_____
शुद्राने वेदपाठ ऐकल्यावर त्याच्या कानात वितळलेले शिसे टाकावे, वेदातील अक्षरांचा उच्चार केल्यावर जिभ कापावी, वेदमंत्र धारण केल्यावर(लक्षात ठेवल्यावर) शरीर कापावे.
(गौतम धर्मसुत्र 3-2-4, संस्कृत ग्रंथमाला,चौखंबा,हिंदी अनु.ऊपेशचंद्र पांडे, पृष्ठ 118)
///////////////////////////////////
काही लोकं म्हणतील आम्ही आता सुधारलो आहोत.
पण असच काही कफिर बद्दल कुराण मध्ये मिळाल असत तर सर्व भारतीय मुसलमानांना आतंकवादी घोषीत केलं असत.
______
क्षत्रिय ब्राह्मणांचे द्वारपाल 👉 भागवत पुराण
ब्राह्मणो ने क्षत्रियो को अपना द्वारपाल बनाया है उन्हे द्वार पर रह कर रक्षा करनी चाहिए.घर मे घुसकर स्वामी के बर्तन मे खाने का उसे अधिकार नही.
(भागवत पुराण 1-18-34)
/////////////////////////////////////
मी काही बोलणार नाही जे ग्रंथात आहे ते दाखवलय फक्त
______
रावणाने सिताच्या स्तनाच वर्णन केल्याची पोस्ट केल्यावर हिंदुत्ववादी स्पष्टीकरण दिलं कि तो राक्षस होता म्हणुन अस वर्णन केलं.
पण रामायणात सिताच्या स्तनाचे वर्णन फक्त रावणानेच नाही तर हनुमान आणी रामाने पण केलं आहे.
सिता हरणानंतर राम शोक करतांना म्हणतात
मेरी प्रिया के दोनो गोल गोल #स्तन जो सदा लाल चंदनसे चर्चित होने योग्य थे,निश्चित हि रक्तकी किचमें सन गये होंगे.
(आरण्यकांड 63/8)
हनुमान लंकेत सिताला बघुन वर्णन करतो
देवी सिताका मुख पुर्ण चंद्रमाके समान मनोहर था,भौंहे सुंदर थी,दोनो #स्तन मनोहर और गोलाकार थे.
(सुंदर कांड 15/28)
////////////////////////////
रावणाने राक्षस असल्यामुळे स्तनाच वर्णन केलं तर हनुमान आणी राम कोण होते ?
मला वाटत ग्रंथ लेखकाने वेगवेगळ्या पात्रांच्या नावाने सिताला माध्यम बनवुन स्वतःची कामवासना पुर्ण करुन घेतली आहे.
_______
No comments:
Post a Comment