Saturday, 24 April 2021

Krishna = Musa = Moses ~ WW

एक ही व्यक्ति के भिन्न भिन्न भाषाओं में भिन्न भिन्न नाम। पर जीवनी और कथा एक।

श्री कृष्ण की कथा जैसी कथा, एक नबी की क़ुरआन में भी मौजूद है और एक प्रोफेट की इंजील (बाइबिल) व तौरेत (तोराह) में भी। जिसे मुसलमान हज़रत ‘मूसा’ कहते है। और क्रिश्चियन और ज्यूस (यहूदी), उन्हें मोज़ेज़ (Moses) कहते है।

क्रूर शासक कंस को आकाशवाणी बताती है कि बहन देवकी का पुत्र कंस का काल बनेगा। ये सुनकर कंस, बहन और जीजा को बंधक बना लेता है। उनके जितने भी पुत्र जन्मते हैं उन्हें मार डालता है। एक प्रकरण ये भी है कि देवकी और वसुदेव से सहानुभूति रखने वाले अन्य लोगों के शिशुओं को भी मारा गया ताकि गुप्त रूप से कोई उनके नवजात को अपने पास रखना चाहे तो भी नवजात न बचा पाये।। लेकिन जब कृष्ण जी के जन्म का समय आया तो काराग्रह के सारे पहरेदारों को मूर्छा आ गई।  वसुदेव ने नवजात बालक को टोकरी में डाला और काराग्रह के खुल चुके द्वारों को पार करते हुए, नदी के पार कृष्ण जी को अपनी दूसरी पत्नी के पास छोड़ आए। जब कृष्ण जी युवा हुए तो एक दिन अपने भाई बलराम के साथ मथुरा आये और कंस का अंत कर दिया।

क़ुरान, बाइबिल और तोराह के अनुसार..

इस्राइल वासियों पर फ़िरऔन (राजा) अत्याचार किया करता था। पुरोहितों ने भविष्यवाणी कि इस्राइली लोगों में एक लड़का जन्म लेने वाला है जो फ़िरऔन के अंत का कारण बनेगा। फ़िरऔन भी इस्राईल में जन्मते लड़कों की हत्या करवाने लगा। जब हज़रत मूसा जन्मे तो उनके माँ बाप ने उन्हें टोकरी में डाल कर नदी में बहा दिया। हज़रत मूसा की बहन उस टोकरे को छुपकर देखती रही कि वो कहाँ पहुंचता है।  ये टोकरी फ़िरऔन की ही एक पत्नी के हाथ लगती है (बाइबल के मुताबिक फ़िरऔन की बेटी के)। वह निस्संतान थी, उसने फ़िरऔन से बच्चा पालने की प्राथना की। फ़िरऔन को खबर नही थी कि ये बच्चा इसरालियों का हो सकता है सो मूसा अपने ही दुश्मन के घर पलने लगे। युवा होते होते मूसा ने फ़िरऔन के इसराइलियों पर अत्याचारों का विरोध करना शुरू किया जिसमें बाद में उनके जैविक भाई हारून भी मदद करने लगे। और आख़िरकार फ़िरऔन मूसा और इस्राइलियों की हत्या के इरादे से पीछा करता है और समुद्र में डूबकर मारा जाता है।

मूसा और कृष्ण जी, दोनो राजकुमार के तौर पर पल रहे थे लेकिन चरवाहे का काम भी करते थे।

मूसा के किस्से में उनके कज़िन “कारून” का ज़िक्र आता है जो बेहद धनी है लेकिन मूसा के विरूद्ध था। कृष्ण जी का एक कज़िन ब्रदर “करण” है। वो। भी बेहद धनी है और कृष्ण जी के विरुद्ध है।

करण को पृथ्वी ने श्राप दिया था जिसके फलस्वरूप युद्ध में उसके रथ का पहिया ज़मीन में धंस गया था जिसके कारण करण का अंत हुआ। क़ारून ने हज़रत मूसा पर व्यभिचार का अभियोग लगाया था जिससे क्षुब्ध होकर मूसा ने उसे श्राप दिया था और क़ारून ज़मीन में धंस गया था और उसका अंत हो गया था।

मुसा के वंशज खुद को एक प्रतापी राजा “यहूदा” के कारण यहूदी कहते है यानी मूसावंशी नही कहलाये गए।
कृष्ण जी का वंश, एक प्रतापी राजा “यदु” के कारण “यादव” कहलाता है यानी कृष्णवंशी नही कहलाये गए।

मूसा ने अनुयायियों को नमाज़ पढ़ने की शिक्षा दी।
कृष्ण जी नअनुयायियों को योग की शिक्षा दी और योगीराज कहलाए। योग और नमाज़ मूलतः ईश्वर की साधना का साधन है। जिसमे शारीरिक और मानसिक अभ्यास है।

चारों में समानताएं और भी है, पर वो बाकी फिर कभी और। चारो  धर्मों में इनकी कथा का वर्णन लगभग एक जैसा ही है।

वो एक निराकार ईश्वर, मनुष्यों के मार्गदर्शन और उद्धार के लिए, अपने ईशदूत इस पृथ्वी पर भेजता रहा है। प्रत्येक ईशदूत की तरह, मूसा, मोज़ेज़ या कृष्ण जी ने भी अंतिम दिन और महाप्रलय की भविष्यवाणी की है जिसके बाद, वो एक अजन्मा-अमर ईश्वर, अपने दिए आदेशों और अच्छे बुरे कर्मों के अनुसार नरक और स्वर्ग का निर्णय करेगा। क्योंकि उसका धर्म तो एक ही है जिसके लोगों ने टुकड़े कर लिए है।

हज़ारों साल पहले जब लेखन और उसे सहेज कर रखना सरल नही था। तब ईशदूतों की कहानियां कहते कहते एक से दूसरी पीढ़ी तक पहुँचती रहीं जिसमे लोग अपने अनुसार जोड़ घटा करते रहे। कहानिया भी थोड़ी बदलती रही। भाषाओं में नाम भी बदलते रहे। आज भी हर आदमी एक बात को अपने अनुसार अपने शब्दों में, अपनी याददाश्त के मुताबिक आगे किसी और को बताता है।

ऐसे ही अलग अलग धर्मों में आये ईशदूतों के नाम और कथाएं काफी समान है। जिनके नाम है:-

प्रथम पुरूष अर्थात आदिम (वेदों में), आदम (क़ुरान में), एडम (बाइबल और तोराह में)!
प्रथम स्त्री अर्थात हवव्यवती (वेदों में), हव्वा (क़ुरान में), ईव (बाइबिल और तोराह में)।
महाजलप्लावन वाले मनु महाराज अर्थात न्यूह (वेदों में), नूह (क़ुरान में), नोहा (बाइबिल और तोराह में)।
श्री रामचंद्र (रामायण में), इब्राहिम (क़ुरान में), अब्राहम (बाइबिल और तोराह में)।
ईसा (क़ुरान में), यीशू या जीसस (बाइबिल में)!

पर इनकी कथाएं कभी और।

No comments:

Post a Comment

निराकर शिव और योगी शिव ~ आर्य समाज

वेदों के शिव. नमः शम्भवाय च मयोभवाय च नम: शंकराय च मयस्कराय च नमः शिवाय च शिवतराय च. [यजु० १६/४१] अर्थ- जो मनुष्य सुख को प्राप्त कराने हारे ...